चौपाल। वन माफिया के निशाने पर चौपाल के जंगल हैं। सरांह रेंज में बीते तीन सप्ताह के भीतर पहले करोड़ों रुपये का सिडार वुड ऑयल पकड़ा गया। इसके बाद देवदार की 165 कड़ियां पकड़ी गई। इस लकड़ी की कीमत लाखों में है। इन मामलों से विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सरांह रेज की कुहल बीट में धवास के पास शुक्रवार को वन विभाग की टीम ने एक व्यक्ति के घर से 165 से अधिक देवदार की कड़ियां बरामद की। हालांकि उस व्यक्ति को वर्ष 2014 में टीडी की मंजूर इमारती लकड़ी मिलने का भी विभाग दावा कर रहा। साथ ही वन विभाग के टीम बरामद देवदार की कड़ियों को ताजा काटी हुई बता रही है। जिस कुहल बीट से लकड़ी बरामद हुई है, वहां से करीब दो किलोमीटर की दूरी वन विभाग की क्यारी बीट में वन विभाग की टीम ने सिडार वुड ऑयल की भट्ठी पकड़ी थी। भट्ठी गांव के संपर्क मार्ग से मात्र 20 मीटर ऊपर कई सालों से बनी हुई थी। देवदार की 165 कड़ियों को जंगल में पेड़ काट कर तैयार किया गया होगा। इसके बाद करीब तीन किलोमीटर दूर गांव तक पहुंचाने के लिए वाहन या मजदूरों की व्यवस्था भी हुई होगी। इसके लिए काफी समय लगा होगा। सवाल उठ रहा है कि विभाग के कर्मचारियों को आखिर तक भनक क्यों नहीं लगी। जब लकड़ी घर पर पहुंची फिर वन विभाग की स्पेशल टीम छापामारी कर रही। पुलिस में अब मामला दर्ज हो गया पर आरोपी पुलिस के हाथ नहीं आया। इससे साफ हो रहा कि पूर्व में रहे किसी वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी के इशारे पर काला कारोबार चल रहा होगा।
लकड़ी में टीडी हैमर नहीं : एमएस
डीएफओ एमएस चंदेल का कहना है कि धबास के पास एक व्यक्ति के घर से पकड़ी गई लकड़ी में टीडी हैमर नहीं है। लकड़ी टीडी से अधिक है। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है। डीएसपी संतोष शर्मा ने कहा कि पुलिस ने मामला दर्ज कर दिया है। पुलिस सबूत के आधार पर कड़ी कार्रवाई कर रही है।