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Rampur Bushahar News: मनरेगा का नाम बदलने पर रामपुर में प्रदर्शन

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रामपुर के चौधरी अड्डे में विरोध प्रदर्शन सीपीआईएम कार्यकर्ता। स्रोत : सीपीआईएम
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सीपीआईएम ने केंद्र सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
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. बोले, मनरेगा का नाम बदलना महात्मा गांधी का अपमान
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में सीपीआईएम ने रामपुर के चौधरी अड्डा पर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और रोष जताया। सोमवार को लोकल कमेटी रामपुर ने प्रदर्शन किया। सीपीएम लोकल कमेटी सचिव कुलदीप सिंह, सदस्य दिनेश मेहता, नीलदत्त शर्मा, मिलाप नेगी, देविंदर और राजपाल ने कहा कि मनरेगा कानून के तहत काम की गारंटी के कानून को बनाने में वामपंथी पार्टियों का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जब यूपीए -1 की सरकार केंद्र में सत्ता में थी, उस समय वामपंथी पार्टियों का सरकार पर दबाव में होने के कारण मनरेगा कानून को लागू करना पड़ा था। मनरेगा कानून एक सार्वभौमिक, मांग पर आधारित कानून है, जो 100 दिन के काम पाने का कानूनी अधिकार देता है। नया कानून इसे बदल देता है और लोगों को काम मांगने के गारंटी के अधिकार से भी वंचित करता है। उन्होंने कहा कि सरकार का 100 से बढ़ाकर 125 दिन रोजगार देने का दावा उसका एक और जाना-माना जुमला है। केंद्र की ओर से राज्य वार खर्च की सीमा तय की जाएगी और अतिरिक्त लागत राज्यों की ओर से वहन की जाएगी। कार्यक्रम की पहुंच को और कम कर देगा और केंद्र की जवाबदेही को कमजोर करेगा। कानून का नाम मनरेगा से बदलकर जी-राम-जी करना महात्मा गांधी का अपमान है और भाजपा/आरएसएस की उनकी विरासत के प्रति दुश्मनी दिखाता है। सीपीआईएम ने मांग की है कि नए कानून को तुरंत वापस लिया जाए। इसके बजाय केंद्र सरकार को राजनीतिक दलों, ट्रेड यूनियनों और ग्रामीण गरीबों के संगठनों के साथ परामर्श करके मनरेगा को मजबूत करना चाहिए। मनरेगा में कम से कम 200 दिन का न्यूनतम रोजगार और 600 रुपये मजदूरी को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी फंड आवंटित करे। प्रदर्शन में राहुल, पूजा, टीटू खन्ना, ललिता, विक्रांत, अर्जुन, मृदुल, विवेक, मोहर सिंह, चंद्रपाल, अंबिका, मंजू, मीना, बंटी और ललित सहित अन्य उपस्थित रहे।
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