अदालत ने सबूतों के अभाव में यह फैसला सुनाया
रामपुर बुशहर।
रोहड़ू कोर्ट नंबर दो ने आभूषण चोरी के एक मामले में भाभी और ननद को बरी कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सबूतों के अभाव में यह फैसला सुनाया। यह मामला 2025 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत रोहड़ू थाना में दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि एक महिला ने 6 अगस्त 2025 को शिकायतकर्ता के घर से सोने का मंगलसूत्र, सोने का नाखून और चांदी की चेन चुराई थी। बाद में आरोपी महिला ने कथित तौर पर कुछ आभूषण अपनी ननद को दिए थे। हालांकि, अदालत ने अभियोजन पक्ष के गवाहों की पहचान और गवाही में कई विसंगतियां पाईं। शिकायत दर्ज करने में भी देरी हुई थी। चोरी की घटना 6 अगस्त 2025 को हुई थी, जबकि प्राथमिकी 14 अगस्त 2025 को दर्ज की गई। अदालत ने पाया कि आरोपी महिला की पहचान संदिग्ध थी, क्योंकि नाबालिग बच्चे की गवाही को माता-पिता की ओर से सिखाया गया बताया गया। पड़ोसी की गवाही भी विश्वसनीय नहीं थी, क्योंकि उसने आरोपी को केवल 20-30 सेकंड के लिए देखा था। सोने के पेंडेंट की बरामदगी भी आरोपी महिला के विशेष ज्ञान या नियंत्रण से साबित नहीं हो सकी। जिस घर से पेंडेंट बरामद हुआ, वह किसी ओर का था और वहां अन्य लोगों की भी पहुंच थी। बरामद किए गए आभूषण की पहचान भी संदिग्ध थी क्योंकि उसमें कोई विशिष्ट पहचान चिह्न नहीं था। मंगलसूत्र में चेन नहीं थी, जबकि शिकायत में चेन का जिक्र था। पुलिसकर्मी और जांच अधिकारी के बयानों में आरोपी को पकड़े जाने के स्थान को लेकर विरोधाभास था। शिकायतकर्ता की पत्नी की ओर से पुलिस स्टेशन में आभूषण की पहचान को लेकर भी विरोधाभास सामने आया। सीसीटीवी फुटेज भी पेश नहीं किए गए, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर हुआ। इन सभी कारणों से अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।