आयु सीमा एवं स्क्रीनिंग टेस्ट की शर्त का जताया विरोध
संवाद न्यूज एजेंंसी
चौपाल(रोहड़ू )। हिमाचल प्रदेश के 140 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने के फैसले के बाद अब प्रधानाचार्यों की नियुक्ति के नियमों पर बहस शुरू हो गई है। स्कूल प्रधानाचार्य और निरीक्षण अधिकारी संघ ने सरकार की ओर से निर्धारित की गई शर्तों का कड़ा विरोध किया है। सरकार ने इन स्कूलों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति के लिए 58 वर्ष की आयु सीमा और स्क्रीनिंग टेस्ट की शर्त रखी है। शिक्षक संघ का कहना है कि ये शर्तें उन अनुभवी अधिकारियों के साथ अन्याय है, जो पहले से ही इन स्कूलों को बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं। संघ के अध्यक्ष हरी शर्मा ने कहा कि सरकार ने हाल ही में कई प्रधानाचार्यों को आईआईएम सिरमौर और सिंगापुर जैसी जगहों पर लाखों रुपये खर्च करके लीडरशिप ट्रेनिंग दिलाई है। ट्रेनिंग के बाद उन्हें उम्र या टेस्ट के आधार पर बाहर करना सरकारी धन की बर्बादी है। कई प्रधानाचार्य राष्ट्रीय और राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। संघ के अनुसार उनकी योग्यता पर सवाल उठाना और परीक्षा लेना उचित नहीं है। वर्तमान में यही प्रधानाचार्य रात-दिन एक करके स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने का काम पूरा कर रहे हैं। संघ के प्रदेशाध्यक्ष हरी शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुश्ताक मोहम्मद, महासचिव विजय शर्मा, संगठन सचिव अश्वनी ठाकुर, राजेंद्र वर्मा, डॉ. प्रेम पाल, डॉ. राशिमा राणा और कमलेश शर्मा आदि ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से आग्रह किया है कि प्रधानाचार्यों के लिए लागू 58 वर्ष की आयु सीमा हटाई जाए, बिना किसी स्क्रीनिंग टेस्ट के उन्हें काम करने दिया जाए और वर्तमान प्रधानाचार्यों को कम से कम एक वर्ष तक इन स्कूलों में अपनी सेवाएं देने का अवसर दिया जाए।