रिकांगपिओ (किन्नौर)। प्रदेश की कांग्रेस सरकार की ग्रीन एनर्जी नीति किन्नौर के लिए विनाशकारी है। विकास के नाम पर स्थानीय लोगों की जमीन, जंगल और जल स्रोतों को कॉर्पोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है। इससे जिले की प्रसिद्ध सेब बागवानी, पर्यटन और समृद्ध संस्कृति खतरे में पड़ गई है। यह बात आम आदमी पार्टी के जिला पर्यवेक्षक श्रीकांत चौहान ने कही। उन्होंने कहा कि हाइड्रो पावर परियोजनाओं के लिए की जा रही टनल ब्लास्टिंग से उरनी, चगांव और मीरू जैसे गांवों के घरों में दरारें आ रही हैं और प्राकृतिक जल स्रोत सूख रहे हैं। आरोप लगाया कि 25 मेगावाट से अधिक की परियोजनाओं को नवीकरणीय ऊर्जा का टैग देना केवल कॉर्पोरेट लूट को बढ़ावा देने का बहाना है। भारी भूस्खलन और पर्यावरणीय खतरों की चेतावनी देने वाली विभिन्न रिपोर्ट की अनदेखी कर सरकार बिना किसी संचयी प्रभाव मूल्यांकन के इन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है, जो भविष्य में बड़ी आपदा को न्योता दे सकता है। आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि स्थानीय लोगों की सहमति के बिना नई परियोजनाओं को तुरंत रोका जाए, प्रभावितों का उचित पुनर्वास हो और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र कमेटी बनाई जाए।