5.44 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में छह माह की सजा बरकरार, 7.20 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। सेब की फसल खरीदने के बाद भुगतान के लिए दिया गया 5.44 लाख रुपये का चेक बाउंस होने के मामले में अदालत ने दोषी की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोषी को छह माह के साधारण कारावास और 7.20 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा को कायम रखा है। मुआवजा अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। यह मामला रामपुर स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किन्नौर की अदालत में दर्ज धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) के तहत शिकायत से संबंधित है। शिकायतकर्ता सुरेश के अनुसार अक्तूबर 2017 में रमेश चंद ने बगीचे से सेब की फसल खरीदने के लिए संपर्क किया था। इसके बाद करीब 1104 क्रेट सेब 900 रुपये प्रति क्रेट की दर से रमेश चंद को दिए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, कुल भुगतान करीब 9.94 लाख रुपये बनता था। रमेश चंद की ओर से पहले 50 हजार रुपये और चार लाख रुपये के चेक का भुगतान हो चुका था। शेष राशि के भुगतान के लिए आरोपी ने 5,44,400 रुपये का चेक दिया, जिसे बैंक में जमा करवाने पर खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 17 जनवरी 2018 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजकर राशि का भुगतान करने की मांग की। भुगतान नहीं होने पर अदालत में शिकायत दर्ज करवाई गई। सुनवाई के बाद निचली अदालत ने 28 दिसंबर 2023 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए छह माह के साधारण कारावास और 7.20 लाख रुपये मुआवजे की सजा सुनाई थी। इस फैसले को आरोपी ने अपील के माध्यम से चुनौती दी। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि निचली अदालत ने साक्ष्यों और कानून का सही आकलन किया था। उसके फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।