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बिशु उत्सव : पारंपरिक वेशभूषा में नाटी डाल लोक संस्कृति के बिखेरे रंग

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शुराचली क्षेत्र के पुजारली गांव में देवता बनाड के मंदिर प्रांगण में बिशु पर्व पर नाटी डालते लोग
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संक्रांति के दूसरे दिन देवता बनाड़ के पुजारली मंदिर में मनाया उत्सव
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लोगों ने देवता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की

संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू।
उपमंडल जुब्बल में पुजारली गांव के देवता बनाड़ मंदिर में बुधवार को बिशु उत्सव मनाया गया। यह उत्सव हर साल संक्रांति के दूसरे दिन मनाया जाताहै। उत्सव की शुरुआत सुबह विशेष पूजा-अर्चना से हुई, जिसमें पुजारियों ने विधि-विधान से देवता बनाड़ की पूजा की। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूरदराज और आसपास के गांवों से लोग पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे और देवता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा के बाद मंदिर प्रांगण में पारंपरिक नाटी डाली। ढोल-नगाड़ों की थापपर युवक-युवतियों, महिलाओं और बुजुर्गों ने एक साथ नाटी डालकर लोक संस्कृति की झलक पेश की। यह दृश्य सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। मंदिर परिसर में दिनभर मेले का माहौल रहा। लोगों ने एक-दूसरे को बिशु की शुभकामनाएं दीं। देवता के वजीर, कारदारों और बुजुर्गों ने बताया कि बिशु उत्सव पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है, जिसे आज भी पूरे उत्साह और आस्था के साथ निभाया जा रहा है। ऐसे आयोजन साबित कर रहे कि हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति आज भी जीवंत है और नई पीढ़ी भी इसे सहेजने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

शुराचली क्षेत्र के पुजारली गांव में देवता बनाड के मंदिर प्रांगण में बिशु पर्व पर नाटी डालते लोग

शुराचली क्षेत्र के पुजारली गांव में देवता बनाड के मंदिर प्रांगण में बिशु पर्व पर नाटी डालते लोग

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