पहले पांच लाख पेटी तक होती थी पैदावार, इस साल आठ लाख पेटियों का उत्पादन
राकेश बिनी शर्मा
निरमंड (कुल्लू)।
निरमंड उपमंडल में इस वर्ष सेब उत्पादन ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। क्षेत्र में इस साल 15 प्रतिशत अधिक सेब उत्पादन हुआ है। बंपर फसल के चलते क्षेत्र में इस बार सेब सीजन 10 दिन पहले ही समाप्त हो गया है। आम तौर पर निरमंड क्षेत्र में सितंबर के आखिरी हफ्ते तक सेब सीजन सिमट जाता है। इस वर्ष मंडियों में सेब के दामों में गिरावट नजर आई। कुछ बगीचों में अधिक नमी और प्रबंधन की कमी की वजह से पतझड़ के चलते फलों में रंग नहीं आ पाया। इस साल निरमंड में सेब की आठ लाख पेटियों के उत्पादन का अनुमान है। बागबानी विभाग आनी के विषयवाद विशेषज्ञ बलवीर चौहान ने बताया कि निरमंड में सेब उत्पादन हर साल ओवरऑल पांच लाख पेटियों तक सिमट जाता था, लेकिन इस साल 15 प्रतिशत अधिक उत्पादन का अनुमान है। सेब सीजन के दौरान निरमंड क्षेत्र से प्रतिदिन करीब 50 छोटी-बड़ी सेब की गाड़ियां निकल रही थीं। इनमें छोटे वाहनों की संख्या 90 से 95 फीसदी थी। वर्ष 2024 में सेब की पांच लाख पेटियों का उत्पादन हुआ था। इस वर्ष अभी तक यह आंकड़ा आठ लाख पहुंच चुका है। बड़े बागबान दिल्ली, जयपुर, सोलन, परवाणू, पिंजौर, चंडीगढ़ और देश की अन्य बड़ी मंडियों में ले जाते हैं, जोकि निरमंड सब्जी मंडी होकर गुजरता है। विषयवाद विशेषज्ञ बलवीर चौहान ने बताया कि उपमंडल के ऊंचाई वाले क्षेत्र अरसू और नित्थर में इस वर्ष सेब उत्पादन औसत से कम जरूर हुआ है, लेकिन चायल, निरमंड और डीम क्षेत्र में अधिक उत्पादन हुआ है। संवाद