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गऊ आधारित कृषि पद्धति से किसान और देश हित संभव : कुलकर्णी

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भारतीय किसान संघ का छौहारा में आयोजित दो दिवसीय अभ्यास वर्ग में भाग लेने वाले बागवान, किसान। स्
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भारतीय किसान संघ का छौहारा में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर हुआ संपन्न
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संवाद न्यूज एजेंसी


रोहड़ू। भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि परंपरागत कृषि गऊ आधारित पशुपालन के साथ ही संभव है। गऊ आधारित कृषि पद्धति से किसान और देश हित संभव है। छौहारा में गांव जाबल में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संपन्न हुआ। इस दौरान अखिल भारतीय संगठन मंत्री ने कहा कि भारतीय किसान संघ की वर्ष 1979 में स्थापना हुई। उस दौरान ही परंपरागत कृषि को अपनाने का संकल्प लिया था। पहले परंपरागत कृषि को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए गए, लेकिन प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करके किसान संघ अपने विचार पर पूरी तरह से खड़ा रहा। प्रशिक्षण शिविर में पांच राज्यों के किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के अंतिम दिन संगठन मंत्री ने कहा कि वर्तमान में देश के कृषि विश्वविद्यालयों के शोध में भी अब भारतीय कृषि पद्धति को किसान और देश हित में माना गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शोध को भारत सहित पूरी दुनिया मानती है। इसमें भी अब परंपरागत कृषि पद्धति का पाठ्यक्रम बना दिया है। किसान संघ ने 50 वर्ष पहले जो बीच बोया था, उसका परिणाम अब सामने आ रहा है। आज गऊ आधारित कृषि के साथ देश का किसान आगे बढ़ रहा है। देश की कई बड़ी कंपनियां अब कृषि क्षेत्र में उतर रही है। उन्होंने कहा कि जब तक जीवन है, तब तक खेती रहेगी। चाहे देश में 4जी या 5जी समेत कितनी ही एआई क्यों न आ जाए, बिना किसान के बिना खेती के जीवन संभव नहीं है, इसलिए गऊ आधारित कृषि स्वस्थ जीवन और स्वस्थ देश का आधार है। इस अवसर पर मुख्य रूप से अखिल भारतीय सह जैविक प्रमुख ठाकुर धर्मपाल और अखिल भारतीय बीज आयाम प्रमुख कृष्ण मुरारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा संघ के उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री सुरेंद्र कुमार, प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर, महामंत्री उमेश सूद, हरिराम पंवार और भुपेंद्र राणा प्रदेश उपाध्यक्ष मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
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