बसारा मेले के अंतिम दिन में खूब नाटी डालते ग्रामीण और देवलू
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ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। प्रदेश की संस्कृति की प्रतीक बसाहरा की बूढ़ी दिवाली मेले में रविवार को ढोल नगाड़ों की थाप पर नाटी का खूब दौर चला। इसके बाद देवी-देवताओं की की विदाई के साथ मेले का विधिवत समापन हुआ। रविवार को पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर लोगों ने पहाड़ी लोग गीतों के साथ घंटों लंबी श्रृंखला बनाकर नाटी का आनंद लिया।
बुशहर रियासत के मुख्य देवता बुशहर दत्त महाराज के मंदिर में हजारों वर्षों से बूढ़ी दिवाली पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। मान्यता है कि यह मेला त्यावल ज्यूरी की देवी सिंहासिनी ने आरंभ किया है। इस बार मेले में गानवीं के देवता लाचा-लाहरू वीर ने सौ वर्ष से भी अधिक समय के बाद शिरकत की। इसके अलावा मेले में दत्त महाराज बसाहरा सहित त्यावल की देवी सिंहासिनी, गसो के देवता महारुद्र और करतोट के देवता राई नाग ने हजारों लोगों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया।
मंदिर कमेटी ने इस अवसर पर भंडारे का आयोजन भी किया। इसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। देवता साहब दत्त महाराज बसाहरा के मोतमीन शिव सिंह ठाकुर ने बताया कि देवता साहब दत्त महाराज के मंदिर में सदियों से बूढ़ी दिवाली का पर्व मनाया जाता है। आधुनिकता के दौर में भी ग्रामीण परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।