सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर अपनी समृद्ध संस्कृति और देव परंपरा के लिए देशभर में मशहूर है। यहां के मेले और त्योहार लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। ऐसी ही देवआस्था का प्रतीक सांगला वैली का बायोलिंग पर्व भी है, जिसमें करीब पांच वर्ष बाद वैली के चार देवताओं का मिलन हुआ। ये सभी देवता आपस भाई हैं और सदियों से इनके मिलन का सिलसिला चल रहा है। वीरवार शाम से बटसेरी गांव में ऐतिहासिक देव परंपरा का प्रतीक माने जाने वाला यह पर्व शुरू हुआ। इस दौरान हजारों ग्रामीण देव मिलन के गवाह बने।
सांगला वैली के चांसू गांव के ईष्ट देवता याकेस नारायण वीरवार शाम को बड़े भाई ब्रदीनारायण और छोटे भाई विष्णुनारायण और तपो नारायण से मिले। देव मिलन के इस नजारे को देखने लिए हजारों लोग बटसेरी में जुटे। करीब 12 वर्षों के बाद बटसेरी में आयोजित हो रहे इस बायोलिंग पर्व देखकर दोनो गांवों के कई बुजुर्ग और महिलाओं की आंखें नम हो गई थी। वीरवार शाम को जब चांसू गांव के देवता बटसेरी गांव के समीप पहुंचे, तो दोनों देवों के मिलन से पूर्व साफ मौसम के बीच करीब 10 से 15 मिनट तक झमाझम बारिश होती रही।
देवों के मिलन से पूर्व बारिश का होना शुभ माना जाता है। इसके बाद चांसू गांव के ईष्ट देवता याकेस नारायण वाद्ययंत्रों की धुनों पर थिरकते हुए अपनी बड़ी बहन माटींगो देवी के यहां पहुंचे, जहां उन्होंने अलग अंदाज में भूमि पर पूरी तरह से शीष नवाकर आदर सत्कार और नमन किया। इसके बाद वह अपने बड़े भाई परवो राजस यानी बद्री नारायण, छोटे भाई विष्णु नारायण और तपोनारायण के साथ भेंट कर वाद्ययंत्रों की धुनों पर थिरकते हुए मिले।
देव मिलन को देखकर दोनों गांव के लोग भावुक हो गए। बायोलिंग यानी दोनों गांवों का एक मैत्रीपूर्ण संबंध को बखूबी निभाना होता है। अगले पांच दिनों तक बटसेरी गांव में मेहमाननवाजी का दौर चलेेगा। देवता बद्रीनारायण के मोतमीन मनोज लोक्ट्स, पुजारी प्रदीप नेगी, माथास अजेंद्र सिंह नेगी, याकेस नारायण के मोतमीन जगत सिंह नेगी, ईश्वर सिंह नेगी, माथास अश्वनी नेगी, पुजारी राजेश कुमार नेगी, कायथ बीरबल लोक्ट्स, माली भुम्पाल नेगी, कुशल सिंह नेगी, कमेटी अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि बायोलिंग पर्व को पांच वर्षों के बाद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।