किन्नौर की टापरी सब्जी मंडी में पहुंचा सेब। संवाद
रिकांगपिओ (किन्नौर)। देश-विदेश में किन्नौर अपने बेहतरीन सेब के लिए जाना जाता है। किन्नौर के बागवानों को प्राकृतिक खेती से तैयार सेब के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। इस कारण बागवान परेशान हैं। सरकार ने अब तक प्राकृतिक खेती से तैयार सेब को भेजने के लिए अलग से मंडी का प्रबंध नहीं किया है। बागवानों का कहना है कि रसायनों, खादों से तैयार सेब और प्राकृतिक रूप से तैयार सेब मंडी में एक ही मूल्य में बिक रहे हैं, जो बागवानों के साथ अन्याय है। वहीं सरकार सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लाखों करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। किसानों-बागवानों को प्राकृतिक खेती की ओर आकर्षित करने के लिए सरकार सेमिनार तो लगा रही है, लेकिन प्राकृतिक रूप से उत्पाद तैयार करने वाले किसानों-बागवानों को धरातल पर कोई लाभ नहीं मिल रहा।
कि सरकार ने अभी तक प्राकृतिक खेती से तैयार सेब की मार्र्र्केट भी नहीं बनाई है। बागवानों का मानना है कि अगर मार्केट बने तो शहरों से खरीदार आ सकते हैं। प्राकृतिक खेती से तैयार सेब का स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। यह सेब सेहत के लिए लाभदायक है। इसमें देसी गाय के गोबर, मूत्र आधारित सूत्रों से मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की संख्या वृद्धि एवं भूमि की उर्वरता में बढ़ोतरी करनी पड़ती है। इसमें कृषि लागत भी कम होती है।
किन्नौर के प्रगतिशील बागवान राधा नेगी ने कहा कि उन्होंने दो हजार सेब पेटी प्राकृतिक खेती से तैयार की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्राकृतिक खेती से तैयार सेब की कीमत रसायन सेब से अलग होनी चाहिए।
बागवान तेजराम ने कहा कि बेशक सेब शक्ल से बिकता है। रसायनिक विधि से तैयार सेब सिर्फ चमकीला होता है, इसमें रस और स्वाद कम होता है। प्राकृतिक खेती से तैयार सेब कुदरती रस से भरपूर होता है और इसमें कोई हानिकारक तत्व नहीं होता।
टापरी सेब मंडी के आढ़ती एवं मेहता फूड कंपनी के प्रबंधक सुशील नेगी ने कहा कि प्राकृतिक खेती से तैयार सेब की कोई अलग से मार्केट और रेट नहीं दे पा रहे हैं। इसके लिए अलग से मार्केट बनाना आवश्यक है, ताकि प्राकृतिक खेती की ओर बागवानों का रुझान बढ़े। उन्हें सेब के उचित मूल्य भी मिल सकें।
उद्यान विभाग किन्नौर के उपनिदेशक राजेंद्र वर्मा ने कहा कि आज तक प्राकृतिक खेती से तैयार सेब की अलग मंडी नहीं है। दोनों प्रकार के सेब को एक ही बक्से की तरह गिना जा रहा है।