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स्पर और विदेशी किस्मों के सेब ने पछाड़ा रॉयल

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आनी (कुल्लू)। प्रदेश के निचले और मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आजकल सेब सीजन जोरों पर चला हुआ है। कोरोना के चलते अधिकतर बागवान दिल्ली के बजाय लोकल सेब मंडियों में अपना सेब बेच रहे हैं। अधिकतर सभी मंडियों से स्पर और विदेशों किस्मों का सेब करीब 15 सौ रुपये से चार हजार रुपये प्रति पेटी के भाव बिक रहा है। जबकि इन किस्मों के सेब ने रॉयल सेब को पूरी तरह से पछाड़ दिया है। विभिन्न मंडियों से मिली जानकारी के मुताबिक रॉयल सेब आठ सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये प्रति बॉक्स के हिसाब से बिक रहा है। कई मंडियों में दर के हिसाब से भाव मिल रहे हैं। जबकि, कई मंडियों में गढ़ के हिसाब से भी भाव चले हैं, जिस पर बागवानों ने दर वाली सेब मंडियों पर दिए जा रहे भाव पर आपत्ति जताई है। आनी क्षेत्र में बागवानों के पास रॉयल किस्म के सेब की अधिकतर पैदावार है, लेकिन रॉयल के दाम बागवानों के मुताबिक न मिलने से बागवान मायूस है। वहीं, आनी वैली ग्रोवर एसोसिएशन का कहना है कि मंडियों में कच्चा और बिना गुणवत्ता वाला रॉयल सेब मंडियों में पहुंचने के कारण रॉयल सेब के बागवानों को उनके मुताबिक दाम नहीं मिल रहे हैं। आनी वैली ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने बागवानों से अपील की है कि रॉयल सेब को समय से पहले न निकालें और रंगदार सेब को ही मार्केट में भेजें। इससे बागवानों को रॉयल सेब के दाम बेहतर मिलेंगे और बागवानों को इसमें दोहरा फायदा भी है। एक ओर जहां सही समय पर सेब के आकार में बढ़ोतरी होगी, वहीं सेब में पूरा प्राकृतिक रूप से रंग भी आएगा। बहरहाल, आनी क्षेत्र में सेब सीजन जोरों पर है। कोरोना के चलते जहां बागवान घबराए हुए थे, फिर भी बागवानों का औसतन सेब अच्छे भाव में बिक रहा है।
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