. विपणन कंपनियां की ओर से खरीद शुरू करने के बाद दाम और मजबूत होंगे
. 30 जुलाई तक जिले की मंडियों में पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 9 लाख पेटियां कम पहुंची
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू/कोटखाई।
जिला शिमला की विभिन्न फल मंडियों में इस वर्ष सेब की आवक में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 30 जुलाई तक जिले की मंडियों में कुल 5,78,900 पेटियां सेब पहुंची हैं, जबकि 30 जुलाई 2025 तक यह आंकड़ा 14,81,953 पेटियां था। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अब तक 9,03,053 पेटियां कम सेब मंडियों में पहुंचा है, जो लगभग 61 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। हालांकि उत्पादन कम होने के बावजूद बागवानों के लिए राहत की बात यह है कि बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले सेब की मांग लगातार बनी हुई है और उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं। बागवानी क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस वर्ष मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों, कम फल सेट और अन्य प्राकृतिक कारणों से उत्पादन प्रभावित हुआ है। परिणामस्वरूप बाजार में सेब की आपूर्ति सीमित रही है। मांग के मुकाबले आवक कम होने से अच्छी गुणवत्ता वाले सेब की कीमतें संतोषजनक बनी हुई हैं और बागवानों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 15 अगस्त के बाद बड़ी विपणन कंपनियां, संगठित खरीदार तथा कोल्ड स्टोर संचालक बड़े पैमाने पर खरीद शुरू करेंगे। इससे उच्च गुणवत्ता वाले सेब के दाम और मजबूत हो सकते हैं। उनका यह भी कहना है कि कुछ व्यापारियों की ओर से विदेशी सेब की खरीद कम किए जाने से घरेलू सेब के लिए बाजार में बेहतर अवसर बने हैं। उन्होंने बागवानों से अपील की कि वे केवल गुणवत्तापूर्ण सेब ही मंडियों में भेजें, ताकि बाजार में हिमाचली सेब की साख बनी रहे और पूरे सीजन के दौरान सभी उत्पादकों को बेहतर मूल्य मिल सके। आठ बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित प्रगतिशील बागवान राम लाल चौहान (कोटखाई) ने कहा कि कम फसल के कारण बागवानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि बाजार मांग और आपूर्ति के सिद्धांत पर चलता है। जब उत्पादन कम और मांग अधिक होती है, तब गुणवत्तापूर्ण उत्पाद को बेहतर मूल्य मिलता है। उन्होंने बागवानों से आग्रह किया कि वे जल्दबाजी में अधपका या कच्चा सेब न तोड़ें, बल्कि फल पूरी तरह तैयार होने पर ही तुड़ाई करें। साथ ही ग्रेडिंग, साइजिंग और पैकिंग पर विशेष ध्यान दें, ताकि हिमाचली सेब की गुणवत्ता और प्रतिष्ठा बनी रहे। राम लाल चौहान ने बताया कि प्रदेश के अलावा देश के अन्य प्रमुख सेब उत्पादक राज्यों में भी इस वर्ष उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहने की सूचना है। ऐसे में पूरे सीजन के दौरान गुणवत्ता वाले भारतीय सेब की मांग मजबूत रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष नाशपाती के दाम भी पूरे सीजन में लगभग स्थिर बने हुए हैं, जो सामान्य वर्षों की तुलना में अलग स्थिति है।