छोटा कंबा में कृ षि विज्ञान केंद्र किन्नौर की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में डा. अरूण ने
छोटा कंबा में कृषि विज्ञान केंद्र प्रशिक्षण कार्यक्रम किया आयोजित
संवादद न्यूज एजेंसी
भावानगर (किन्नौर)। कृषि विज्ञान केंद्र किन्नौर ने छोटा कंबा में समशीतोष्ण फलों के वृक्ष छत्र प्रबंधन पर जनजातीय उपयोजना के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। कृषि विज्ञान केंद्र किन्नौर ने जिले के दुर्गम गांव कंबा में समशीतोष्ण फलों के वृक्ष छत्र प्रबंधन और उत्पादन के बारे में किसानों-बागवानों को जानकारी दी। इस कार्यक्रम में 50 बागवानों ने भाग लिया और आधुनिक बागवानी तकनीकों की जानकारी हासिल की। छोटा कंबा की पंचायत प्रधान स्नेह लता और उपप्रधान जसमन सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र की टीम का स्वागत करते हुए इस पहल की सराहना की। फल विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार नेगी ने सेब, जापानी फल, आड़ू, कीवी और अंगूर जैसे समशीतोष्ण फलों में वृक्ष छत्र प्रबंधन के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि सही छंटाई, आकार प्रबंधन और रोग नियंत्रण से फलों की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार किया जा सकता है। छोटा कंबा एक दुर्गम गांव है, जहां किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों की सीमित जानकारी है। पारंपरिक तरीकों के कारण न केवल उत्पादन कम हो रहा है, बल्कि फलों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक विधियों से अवगत करवाना था, जिससे वे अपनी आय बढ़ा सकें। कृषि विज्ञान केंद्र इन नई किस्मों के प्रदर्शन और प्रभाव पर निगरानी और शोध करेगा, ताकि क्षेत्र के लिए सबसे उपयुक्त किस्मों की पहचान की जा सके। टीएसपी योजना के तहत जिले की 18 पंचायतों में इसी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान किसानों को परागण तकनीक, पोषण प्रबंधन और रोग नियंत्रण पर भी जानकारी दी गई, जिससे वे अपनी फसल को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बना सकें। समापन सत्र में उप प्रधान जसमन सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र की टीम का आभार व्यक्त किया और अनुरोध किया कि गरशू गाँव में भी इस तरह के प्रशिक्षण आयोजित किए जाएं। इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र ने छोटा कंबा के बागवानों को सेब की उन्नत किस्में वितरित कीं और वृक्ष छत्र प्रबंधन से उत्पादन और फलों की गुणवत्ता में सुधार पर जोर दिया।