. बैंक को ऋण चुकाने के लिए दिया चेक हुआ था बाउंस
. 6.90 लाख रुपये के जुर्माने की सजा को भी बरकरार रखा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
रोहड़ू की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी की आपराधिक अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत की ओर दी गई आठ महीने के साधारण कारावास और 6.90 लाख रुपये के जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। यह मामला एचपी राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, चिड़गांव की ओर से दाखिल किया गया था। आरोपी श्याम मुरारी ने वर्ष 2019-2020 में बैंक से 7 लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण की किस्तें चुकाने में विफल रहने पर उन पर 6,84,588 रुपये बकाया हो गए। उन्होंने इस देनदारी के लिए 23 जून 2022 को 6,84,588 रुपये का एक चेक जारी किया था। यह चेक 1 जुलाई 2020 को अपर्याप्त धनराशि के कारण अनादरित हो गया। बैंक ने 13 जुलाई 2022 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन श्याम मुरारी ने चेक राशि का भुगतान नहीं किया। निचली अदालत ने 9 सितंबर 2025 को उन्हें दोषी ठहराया और 16 सितंबर 2025 को सजा सुनाई थी। अपील में श्याम मुरारी ने तर्क दिया कि चेक का दुरुपयोग किया गया और कोई कानूनी देनदारी नहीं थी। अदालत ने पाया कि श्याम मुरारी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर से इन्कार नहीं किया। उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के अनुसार, एक बार जब आरोपी चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार कर लेता है, तो परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 139 के तहत देनदारी की धारणा बनती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा के तौर पर दिया गया चेक भी कानूनी देनदारी को आकर्षित कर सकता है। श्याम मुरारी इस धारणा को खंडित करने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत पेश नहीं कर पाए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया। अपील खारिज करते हुए, अदालत ने निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के आदेश को बरकरार रखा। श्याम मुरारी को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया है।