. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रोहड़ू की अदालत ने सुनाया फैसला
. साल 2020 में युवती ने पब्बर नदी में कूद कर दी थी जान
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रोहड़ू की अदालत ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी से बरी कर दिया। यह मामला 2020 में एक युवती की मौत से जुड़ा था। उसका शव पब्बर नदी के पास मिला था। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने फोन पर युवती को आत्महत्या के लिए उकसाया था। पुलिस स्टेशन चिड़गांव में 30 मई, 2020 को एक युवती के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। अगले दिन पब्बर नदी के पास उसका शव मिला। युवती की मां कलावती ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के आयुषमान (जिसे बाद में अमरजीत यादव के रूप में पहचाना गया) ने उनकी बेटी को आत्महत्या के लिए उकसाया। युवती के मोबाइल फोन में 29 मई, 2020 की एक रिकॉर्डिंग मिली। इस रिकॉर्डिंग में एक व्यक्ति उसे गाली दे रहा था और आत्महत्या के लिए मजबूर कर रहा था। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि यह आवाज अमरजीत यादव की थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि युवती और आरोपी फोन और व्हाट्सएप के माध्यम से एक-दूसरे को जानते थे। वे कभी मिले नहीं थे। 29 मई, 2020 को उनके बीच हुई बातचीत युवती के फोन में रिकॉर्ड हो गई। रिकॉर्डिंग में आरोपी अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा था। फोन की रिकॉर्डिंग आरोपी की आवाज के नमूने से मेल खाती थी। उन्होंने यह भी कहा कि युवती ने अपनी डायरी में कुछ पन्ने लिखे थे। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि युवती ने आत्महत्या की थी। किसी गवाह ने उसे नदी में कूदते नहीं देखा। जांच में डिप्रेशन या फिसलने का कोई सबूत नहीं मिला। युवती की डायरी में अमरजीत यादव का नाम नहीं था। डायरी में योशा का जिक्र था, पर अभियोजन पक्ष इसे अमरजीत यादव से नहीं जोड़ पाया। आरोपी का अपराध करने का मानसिक इरादा और सक्रिय भूमिका भी साबित नहीं हुई। कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला।