नगवाईं मे राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन पर लगे कार्यक्रम में भाग लेती महिलाए स्त्रोत संगठन
नगवाईं (मंडी)। जिला के नगवाईं में आयोजित चार दिवसीय अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क की स्वास्थ्य के अधिकार यात्रा रविवार को संपन्न हो गई। इसमें अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क के सचिव आशा मिश्रा ने भारत के सर्वाधिक निजीकृत स्वास्थ्य व्यवस्था में शामिल होने की चिंता जाहिर की। भारत सरकार से मांग की गई कि विश्व स्तर पर अग्रणी स्थान के लिए स्वास्थ्य के अधिकार का कानून बनाना जरूरी होगा।कार्यशाला में उत्तरी भारत के 8 राज्यों हिमाचल, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से 60 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान 14 सत्र आयोजित किए गए। इनमें विभिन्न राज्यों से राष्ट्रीय सत्र के 8 विशेषज्ञों ने स्रोत व्यक्तियों के रूप में जानकारी साझा की और प्रतिभागियों की क्षमताओं में इजाफा किया। सत्रों में प्रमुख रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल में बाधाएं, हाशिए पर खड़े लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल में स्वास्थ्य तंत्र की भूमिका, स्वास्थ्य की राजनीतिक आर्थिक, असमानता एवं स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारक, स्वास्थ्य की देखभाल में व्यापारीकरण की भूमिका शामिल रहे। इसके अलावा स्वास्थ्य के अधिकार के लिए जन आंदोलन, दवाओं तक पहुंच की चुनौतियां, कोविड काल में सामुदायिक भागीदारी, राज्य विशेष की स्वास्थ्य अधिकार और अन्य शामिल रहे। कार्यशाला के दौरान विचार विमर्श में निष्कर्ष निकल कर सामने आया कि नागरिक समाज की तमाम कोशिशों के बावजूद आजादी के 76 वर्षों के बाद भी सरकार स्वास्थ्य पर एक प्रतिशत से ज्यादा खर्च नहीं कर पा रही हैं, जो कि तथाकथित लोकप्रिय सरकारों की जनता के स्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
जन स्वास्थ्य अभियान के संयोजक प्रो. इंद्रिनील ने कहा कि स्वास्थ्य पर खर्च न बढ़ाते हुए निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने का काम किया जा रहा है। कार्यशाला में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य जोगिंद्र वालिया ने कहा कि अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क आगामी माह में पूरे देश में जन स्वास्थ्य अभियान जैसे सहयोगी नेटवर्क एवं संगठनों तथा जन आंदोलनों के साथ मिलकर स्वास्थ्य के अधिकार के लिए संघर्ष को तेज करेगा।
कार्यशाला में पुणे से डॉ. अभय शुक्ला, सह संयोजक ऋचा, चिंतन, आंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली से इंदिरा चकवर्ती, छाया पछोली, एनआर ठाकुर, अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से डॉ. नफीस, आशा मिश्र, डॉ सतनाम, हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति स्वास्थ्य उप समिति के संयोजक सत्यवान पुंडीर मौजूद रहे।