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कोरोना काल में बढ़ी आयुर्वेदिक काढ़े की मांग

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लड़भड़ोल (मंडी)। कोरोना काल में काढ़े की बढ़ती मांग को देखते हुए जोगिंद्रनगर स्थित आयुर्वेदिक फार्मेसी में सात लाख पैकेट बनाए जाएंगे। इससे पहले यहां पर 3600 किलो काढ़ा बनाकर प्रदेश में भेजा जा चुका है। सात लाख पैकेट बनाने का काम शुरू हो गया है, जबकि सूबे के 1200 आयुर्वेदिक फार्मेसी और तीस बड़े आयुर्वेदिक अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति करने वाली इस फार्मेसी में 13 तरह की दवाओं का निर्माण पहले से ही हो रहा है। हालांकि बीच में कच्चे माल की कमी खली थी, लेकिन अब वह कमी भी दूर हो गई है। कोरोना काल में आयुर्वेद की महत्ता को देख यहां दवा निर्माण ने गति पकड़ी है। यहां सर्पगंधा मिश्रण के अलावा त्रिफला चूर्ण, चंद्र प्रभावटी, आरोग्य वर्धन वटी, मधुयष्टीयादि कषाय औषधियों और जड़ी बूटियों से निर्मित दवाएं तैयार होती रही हैं। आयुर्वेद विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. श्याम सुंदर के अनुसार फार्मेसी का निरीक्षण किया जा चुका है। आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण और मशीनरी की जानकारी ली गई। इस फार्मेसी में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए भवन निर्माण का कार्य जारी है। यहां पर आधुनिक मशीनरी लगाकर दवा निर्माण में तेजी लाई जाएगी।
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