अब आपातकाल में आपकी कॉल के 100 सेकेंड के भीतर 108 एंबुलेंस ठहराव स्थल से रवाना कर दी जाएगी। इसका दावा जीवीके ईएमआरआई के राज्य प्रभारी मेहुल सुकुमारन ने किया है। कॉल मिलते ही एंबुलेंस को डिस्पैच करने की तैयारी शुरू हो जाएगी।
पूर्व में कॉल मिलने के तीन मिनट के भीतर एंबुलेंस डिस्पैच की जाती थी, लेकिन अब इसमें सुधार किया गया है। जिससे आपातकाल में मरीजों को सुविधा मिलेगी। हादसा होने पर तत्काल उपचार के लिए एक-एक सेकेंड कीमती होता है।
108 नेशनल सर्विस एंबुलेंस ने रोगियों को तुरंत एंबुलेंस मुहैया करवाने के उद्देश्य से डिस्पैच समय में बदलाव कर दिया है। इसके लिए कई सॉफ्टवेयर अपग्रेड किए गए हैं। वर्तमान में अमूमन सभी मामलों में एंबुलेंस को कॉल मिलने के 100 सेकेंड के भीतर भिजवाया जा रहा है।
कॉल सुन रहे कर्मचारी भी इसी लक्ष्य के साथ तुरंत सभी प्रकार की जानकारी लेकर आगामी कार्रवाई निपटा रहे हैं। इस निर्णय से सबसे अधिक राहत दुर्घटना के मामलों में मिलेगी। तुरंत एंबुलेंस डिस्पैच होने के साथ घटना स्थल पर नेशनल एंबुलेंस सर्विस का स्टाफ पहुंचेगा। पूर्व में इस सारी प्रक्रिया को पूरी करने में करीब तीन मिनट तक लग जाते थे। नेटवर्क सहित अन्य दिक्कत होने पर यह समय बढ़ भी जाता था, लेकिन वर्तमान में 100 सेकेंड के लक्ष्य के साथ काम किया जा रहा है।
नेटवर्क की दिक्कत वाले मामलों में देरी होने की संभावना है।
इधर, जीवीके ईएमआरआई के राज्य प्रभारी मेहुल सुकुमारन ने बताया कि कॉल मिलने पर 100 सेकेंड पर एंबुलेंस डिस्पैच की जा रही है, ताकि आपातकाल के समय मरीजों को दिक्कत पेश न आए। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2015 तक खतरे वाले मामलों में 45411 लोगों की जान 108 एंबुलेंस के माध्यम से बचाई गई है।
2300 से 2500 कॉल्स दर्ज की जाती हैं रोजाना
108 पर की गई कोई भी कॉल जान बचाने जैसी आपातकालीन कॉल के रूप में ली जाती है। धर्मपुर, जिला सोलन स्थित आपातकालीन प्रबंधन केंद्र में प्रतिदिन औसतन 2300 से 2500 कॉल्स दर्ज की जाती है। एंबुलेंस भेजने की प्रक्रिया में कोई त्रुटि न रह जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन केंद्र में कार्यरत आपातकालीन प्रतिक्रिया अधिकारी सभी तथ्यों को एकत्रित करता है और उसे समझकर नजदीकी वाहन को घटनास्थल पर भेजता है।