मंडी। राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड से पंजीकृत 80 हजार मनरेगा और निर्माण मजदूरों की वित्तीय सहायता रोके जाने को लेकर मंगलवार को मंडी शहर में मजदूर संगठनों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान मजदूर संगठन सीटू के नेतृत्व सेरी मंच पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ रैली निकाली और सुक्खू सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान उपायुक्त कार्यालय के मुख्यद्वार पर जनसभा भी की की । बाद में उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा।सीटू राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और संयुक्त संघर्ष समिति के राज्य संयोजक भूपेंद्र सिंह ने बताया कि बीते माह घुमारवीं में बनी योजना के अनुसार जिला स्तर पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को मंडी में पहली विरोध रैली हुई। बताया कि सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार की ओर से मनरेगा और निर्माण मजदूरों को श्रमिक कल्याण बोर्ड से बाहर करने और उनकी सहायता रोकने का फैसला 12 दिसंबर 2022 को लिया था। इसके खिलाफ सभी ट्रेड यूनियनों ने विरोध किया, लेकिन सरकार ने प्रदेश के साढ़े चार लाख मजदूरों की करोड़ों रुपये की सहायता रोक दी है। इसके साथ बोर्ड में पंजीकरण और नवीनीकरण भी रोक दिया है। इसके खिलाफ जनवरी माह से गांव-गांव में जनअभियान किया गया। अब जिला स्तर पर विरोध रैलियां आयोजित की जा रही हैं। आने वाले दिनों में भी प्रदेशभर के अन्य जिलों में उपायुक्तों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे और रैलियां निकाली जाएंगी। बोर्ड सदस्य और टीयूसीसी के राज्य महासचिव रविंद्र कुमार ने बताया कि हिमाचल में कांग्रेस पार्टी के लिए यह फैसला आत्मघाती होगा और दो माह बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में उन्हें इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
इंटक के वाईपी कपूर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की सरकार ने पंजीकृत निर्माण मजदूरों की यूनियनों को नियुक्ति पत्र जारी करने के अधिकार से वंचित कर दिया है। इंटक और अन्य मजदूरों ने बड़ी उम्मीद से प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनाई थी, लेकिन उसने पहले से मिल रही सहायता भी रोक दी है। एसकेएस के अध्यक्ष संत राम ने भी मजदूरों के हकों के लिए आवाज बुलंद की। इस अवसर पर राजेश शर्मा, शोभा राम, रविंद्र कुमार और अन्य मौजूद रहे।