जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर-पठानकोट तक रेलवे स्टेशनों में सुरक्षा के प्रबंधों में बरती जा रही लापरवाही के चलते यहां संदिग्ध बेखौफ पहुंच रहे हैं। 164 किलोमीटर के हेरिटेज ट्रैक के अधीन आने वाले मुख्य 16 स्टेशनों में कहीं पर भी उत्तर रेलवे की ओर से सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था नहीं की गई है।
ऐतिहासिक जोगिंद्रनगर रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती नहीं हो सकी है। चारों ओर से रास्ते खुले हैं। यहां संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए शरारती तत्व जमे रहते हैं। रेलवे के खंडहर भवनों में नशे की महफिलें सजना आम हो गया है। भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थान पर नशा तस्कर भी सक्रिय रहते हैं।
ऐसे कुछ मामलों में स्थानीय पुलिस ने दबिश देकर पुलिस थाने में भी कुछ संदिग्धों को तलब कर आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई है। मगर रेलवे की ओर से ऐसे कोई भी सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिससे संदिग्धों का पर्दाफाश हो सके। हाल ही में जोगिंद्रनगर रेलवे स्टेशन से चरस तस्करों के रवाना होने के मुंबई पुलिस के खुलासे ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
उधर, जोगिंद्रनगर रेलवे स्टेशन के अधीक्षक रविंद्र रावत, बैजनाथ पपरोला के स्टेशन अधीक्षक राजेश भारद्वाज का कहना है कि रेलवे पुलिस के जवान समय-समय पर स्टेशनों में गश्त कर संदिग्धों पर नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय पुलिस से भी रेलवे विभाग स्टेशन के सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा करवाता है। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरों की स्टेशन में उपलब्धता और सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति का मामला भी उच्चाधिकारियों से उठाया जाएगा।
स्टेशन से 50 किलोमीटर दूर है रेलवे विभाग की चौकी
पठानकोट-जोगिंद्रनगर हेरिटेज रेलवे ट्रैक पर अगर कोई भी अप्रिय घटना घटती है तो उससे निपटने के लिए रेलवे पुलिस के जवान भी करीब 50 किलोमीटर दूर पालमपुर स्थित चौकी से पहुंचते हैं। बैजनाथ पपरोला, नगरोटा, कांगड़ा, रानीताल, नूरपुर और जोगिंद्रनगर में रेलवे विभाग की कोई पुलिस स्थायी तौर पर सक्रिय नहीं है। ऐसे में हर रोज स्टेशन से आवागमन कर रही रेलगाड़ियों में सवार सैकड़ों लोगों में अगर कोई संदिग्ध भी सवार हो जाए तो उसकी भनक नहीं लग पाती है।