मंडी। पंद्रहवें दिन बाबा भूतनाथ मंदिर में घृतकंबल से वृंदावन मथुरा के बांके बिहारी का स्वरूप उकेरा गया। वृंदावन में श्री कृष्ण और राधा रानी विग्रह रूप में सदैव उपस्थित हैं। यह मंदिर भारत के प्राचीन मंदिरों में से एक है, जिसका निर्माण स्वामी हरिदास ने करवाया था। वृंदावन बांके बिहारी लाल के आधुनिक मंदिर की स्थापना लगभग 200 वर्ष पूर्व हुई थी। इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक दिलचस्प कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार बांके बिहारी के दर्शन करने भरतपुर के राजा अपनी रानी के साथ आए। रानी अत्यंत सुंदर थी और जब उन्होंने बांके बिहारी की आंखों में देखा तो बांके बिहारी उनके सौंदर्य पर मोहित हो गए और एक गोप का रूप धारण कर उनके साथ भरतपुर चले गए। जब मंदिर के पुजारियों ने देखा की बांके बिहारी अपने स्थान पर नहीं हैं तब वे समझ गए कि वह भरतपुर जा चुके हैं। पुजारियों ने भरतपुर जाकर बांके बिहारी को बहुत मनायाए तब जाकर वे वापस आने के लिए तैयार हुए। उन्हें राजा और रानी दोनों ही वृंदावन छोड़ने आए। तब राजा ने कहा कि यहां पर बांके बिहारी का भव्य मंदिर बनवाना चाहते हैं और यह कार्य उन्होंने अपने पुत्र रतनसिंह को सौंप दिया। राजकुमार ने वृंदावन में रहकर भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। इसका कार्य 1865 ईसवी में पूरा हुआ।