मंडी। बाबा भूतनाथ मंदिर में शिवलिंग पर शुक्रवार को केरल के वैकोम महादेव मंदिर का रूप उकेरा गया। महंत देवानंद सरस्वती ने बताया कि अब तक करीब डेढ़ क्विंटल मक्खन बाबा के शिविलंग पर चढ़ चुका है। तारा रात्रि के बाद 14वें दिन केरल के वैकोम महादेव का रूप उकेरा गया। वैकोम के शिव को प्यार से वैक्कथप्पन कहा जाता है। यहां के शिवलिंग को त्रेता युग से माना जाता है और यह केरल के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। यहां पूजा की प्राचीन विधि को बदला नहीं गया है। मान्यता है कि माल्यवन से शैव विद्या उपदेश प्राप्त करने पर खरसुर चिदंबरम गए और मोक्ष की प्राप्ति के लिए घोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनके सभी वरदानों को पूरा किया। उन्हें तीन महान शिवलिंगों के साथ प्रस्तुत किया। यह आश्वासन देते हुए कि वे उनमें उपस्थित रहेंगे। भगवान शिव गायब हो गए, उन्होंने खारा से मोक्ष प्राप्त करने के लिए शिवलिंगों की पूजा करने के लिए कहा। जब खारा तीन लिंगों के साथ हिमालय से दक्षिण की ओर लौट रहा था, एक उसके दाहिने हाथ में, एक बाएं हाथ में और दूसरा गर्दन में, वह थका हुआ महसूस कर रहा था और थोड़ी देर आराम करने के लिए रुका। विश्राम के बाद जब उन्होंने शिवलिंगों को उठाने का प्रयास किया तो वे हिले नहीं। उन्होंने महसूस किया कि यह शिव की माया थी और जब उन्हें बुलाया गया तब खारा ने कहा कि मैं यहां मोक्ष देने के लिए रहूंगा। खारा ने मोक्ष प्राप्त करने के बाद पवित्र लिंगों को महर्षि व्याघ्रपद के संरक्षण में सौंप दिया, जिन्होंने अदृश्य रूप से उनका पीछा किया और ऋषि से उनकी रक्षा और पूजा करने के लिए कहा। ऋषि ने उनमें से एक शिवलिंग यहां वैकोम में स्थापित कर दिया।