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Mandi News: अपनों की यादें धुंधली हुईं पर ‘ममता’ ने पहचान लिया

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सरकाघाट की ग्राम पंचायत अपर बरोट के गांव जरल का राजू अपने परिजनों के साथ। स्रोत जागरूक पाठक
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40 साल बाद दिल्ली की सड़कों से वापस सरकाघाट पहुंचा राजू
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मां की आंखों से छलके खुशी के आंसू, 15 साल की उम्र में हुआ था लापता

संवाद न्यूज एजेंसी

सरकाघाट (मंडी)। कहते हैं कि ममता की डोर कितनी भी समय की आंधियों में उलझ जाए, वह टूटती नहीं और किस्मत अगर साथ दे तो बिछड़े हुए अपने फिर से मिल ही जाते हैं। ऐसा ही भावुक और अविश्वसनीय दृश्य सरकाघाट की ग्राम पंचायत अपर बरोट के गांव जरल (फतेहपुर) में देखने को मिला। जहां चार दशक पहले लापता हुआ राजू (55) अचानक अपने परिवार के बीच लौट आया। 95 वर्षीय माता शंकरी देवी ने जैसे ही वर्षों बाद अपने बेटे को देखा, उनके जीवन भर का इंतजार मानो एक पल में आंसुओं में बह निकला और पूरे क्षेत्र में भावनाओं की लहर दौड़ गई।राजू, स्वर्गीय परमानंद के पुत्र हैं, जो करीब 15 वर्ष की उम्र में अचानक घर से लापता हो गया था। उस समय परिजनों ने उसे हर संभव जगह ढूंढा, लेकिन कोई सुराग न मिलने पर उन्होंने उसे मृत मान लिया था। राजू ने बताया कि घर से निकलने के बाद वह पुरानी दिल्ली पहुंच गया, जहां उसने वर्षों तक लाल किले के पास स्थित अशोका ढाबे में काम किया। बाद में स्वास्थ्य बिगड़ने और मानसिक स्थिति प्रभावित होने के कारण वह सड़क पर लावारिस जीवन जीने लगा और इस दौरान उसकी याददाश्त भी खो गई। राजू की घर वापसी का श्रेय श्रद्धा पुनर्वास केंद्र (श्रद्धा फाउंडेशन) को जाता है। संस्था के सामाजिक कार्यकर्ता स्वरूप कुमार (निवासी कांगड़ा) ने बताया कि 23 मई 2024 को राजू को दिल्ली की सड़कों से लावारिस हालत में रेस्क्यू कर संस्था में भर्ती कराया गया था। वहां मनोचिकित्सकों की देखरेख में इलाज के बाद धीरे-धीरे उसकी याददाश्त लौटी और उसने अपने गांव तथा परिजनों से जुड़ी जानकारी साझा की। इस संस्था के संस्थापक डॉ. भरत वाटवानी को वर्ष 2018 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। संस्था अब तक लगभग 14,000 भटके हुए लोगों को उनके परिवारों तक पहुंचा चुकी है। पंचायत के पूर्व प्रधान दलीप राव की मौजूदगी में जब राजू को गांव लाया गया तो शुरुआत में सन्नाटा छा गया लेकिन, जैसे ही 95 वर्षीय माता शंकरी देवी ने राजू के स्वभाव और बचपन में उसकी आंख पर लगे चोट के निशान से उसे पहचाना, पूरा माहौल भावुक हो उठा। मां-बेटे का यह मिलन देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। राजू के भाइयों जोगिंदर सिंह, विजय कुमार और सुरेश कुमार ने मिठाई बांटकर उसका स्वागत किया और उसकी देखभाल का पूरा जिम्मा उठाया। राजू का उपचार अभी जारी रहेगा और संस्था की ओर से उसकी दवाइयां घर पर ही निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। पूर्व प्रधान दलीप राव ने बताया कि राजू ने अपने स्कूल, मामा और दिवंगत पिता से जुड़ी जो बातें साझा कीं, उनसे यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि वह इसी परिवार का सदस्य है।
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