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डंडों में बांध कर नौणी माता मंदिर पहुंचाई 4-4 क्विंटल की मूर्तियां

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शेर की मूर्ति को नौणी माता मंदिर पहुंचाते लोग।
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पधर (मंडी)। चौहारघाटी के समालंग गांववासियों ने आस्था का उदाहरण पेश किया है। नौणी माता मंदिर के मुख्य द्वार पर लगाने के लिए शेर की मूर्तियां राजस्थान से लाईं। ग्रामीणों ने पहले तरसवाण-गढ़गांव करीब पांच किलोमीटर सड़क से मलबा हटाकर जीप योग्य बनाया।
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उसके बाद चार-चार क्विंटल की मूर्तियों को जीप में रखकर गढ़गांव पहुंचाया। यहां से करीब ढाई किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ कर मूर्तियों को मंदिर तक पैदल पहुंचाया। इस दौरान मूर्तियों को डंडों से बांधा था। करीब 50 लोगों ने श्रमदान किया।
लोक निर्माण विभाग इस सड़क को बहाल नहीं कर पाया था। ऐसे में लोगों ने पहले मार्ग से खुद मलबा हटाया। उसके बाद जीप से दोनों मूर्तियों को गढ़गांव पहुंचाया। यहां से डंडों में बांध कर 4-4 क्विंटल वजन की मूर्तियां कंधे के सहारे पैदल ढाई किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ कर मंदिर परिसर समालंग पहुंचाई गईं।
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बता दें कि गत वर्ष ही समालंग में करीब 60 लाख की लागत से नौणी माता का भव्य मंदिर काष्ठशैली से तैयार किया गया है।
मंदिर कमेटी नवरात्र में मूर्ति स्थापना की योजना बना रही है। माता के गूर प्रेम सिंह ने कहा कि मंदिर निर्माण के साथ-साथ शेर की दोनों मूर्तियों के लिए स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने आर्थिक सहयोग दिया। इसी तरह की काष्ठकुणी शैली से ही उरला स्थित करालडी में भी चौहारघाटी के बजीर नाम से विख्यात आराध्य देव पशाकोट मंदिर का निर्माण भी जोरों पर चला हुआ है।
नौणी माता और फुंगणी माता देवाधिदेव हुरंग नारायण और आराध्य देव पशाकोट की बहनें हैं। फुंगणी माता का मंदिर धमच्याण पंचायत के पजौंडी गांव में स्थित है। संवाद
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