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Mandi News: सूखे जैसे हालात से फसलों को सात करोड़ रुपये का नुकसान

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मंडी। सूखे से जमीन से लेकर पहाड़ तक प्रभावित हो गए हैं। एक तरफ बारिश न होने से फसलें सूखने लगी हैं वहीं, पहाड़ बिना बर्फबारी के सूने पड़े हुए हैं। सूखे का आम जनजीवन के अलावा कृषि और बागवानी में असर पड़ रहा है। कृषि विभाग के तहत 71,308 में से 10,473 हेक्टेयर भूमि पर सूखे से फसलें प्रभावित हुई हैं। सबसे अधिक नुकसान गेहूं फसल को आंका गया है। कृषि विभाग ने सूखे से फसलों को कुल 7.04 करोड़ रुपये नुकसान आंका गया है। अगर जल्द बारिश न हुई तो यह नुकसान का आंकड़ा और बढ़ेगा। इसी तरह पेयजल स्रोत भी सूखते जा रहे हैं। आगामी सप्ताह में पेयजल संकट गहराने की भी आशंका है।जिले में 58,800 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं बिजाई की गई है। सूखे से 10,014 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल 33 फीसदी से कम प्रभावित हो गई है। करीब 5.60 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है। इसके अलावा जौ मंडी जिले में 2900 हेक्टेयर भूमि पर बोई गई है। इसमें से 62 हेक्टेयर भूमि पर जौ फसल प्रभावित हुए हैं। करीब 4.26 लाख रुपये नुकसान हुआ है। इसी तरह दालें 4940 हेक्टेयर भूमि पर बोई गई हैं। इसमें से 154 हेक्टेयर भूमि पर फसल प्रभावित हुई है और 58 लाख रुपये नुकसान हुआ है, जबकि 4000 हेक्टेयर भूमि पर बोई गई सब्जी में से 235 हेक्टेयर भूमि पर फसल सूखे से प्रभावित हुई है। सूख से दालें 80 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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इसी तरह जल शक्ति विभाग की बात करें तो फिलहाल सुंदरनगर सर्किल की पेयजल योजना प्रभावित तो नहीं हुई हैं, लेकिन पेयजल स्रोतों में जल की कमी आंकी जा रही है। इस पर जल शक्ति विभाग निगरानी रखे हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि एक सप्ताह बारिश न हुई तो पेयजल स्रोतो में जल की भारी कमी हो सकती है। जिसका सीधा असर पर पेयजल योजनाओं में पड़ सकता है। ऐसे में पेयजल सप्लाई में कटौती भी हो सकती है।
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सूखे के कारण जिलेभर में फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट ली गई है। किसान भाई जहां सिंचाई सुविधा उपलब्ध है, वहां इसका इस्तेमाल करें। फील्ड की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों से साझा की जा रही है।
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-राजेश डोगरा, उपनिदेशक कृषि विभाग मंडी
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सुंदरनगर सर्किल के तहत फिलहाल पेयजल योजना प्रभावित नहीं हुई है, लेकिन यह जरूर है कि पेयजल स्रोतों में पानी की कमी आई है। यदि एक सप्ताह में बारिश न हुई तो स्थिति गंभीर हो सकती है। फिलहाल मांग के अनुसार पानी मिल रहा है।
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-रोहित दुबे, अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति विभाग
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