शिवजी को अर्पित करने के लिए न्यार की माला बनाते लोग। संवाद
गोहर (मंडी )। महाशिवरात्रि पर्व नाचन और सराज घाटी में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। बुधवार को घाटी के लोगों ने शिवजी की विशेष पूजा-अर्चना की और न्यार, कुपु, रखाल और द्रुभा की माला भोलेनाथ को अर्पित की। खारका उत्सव के दौरान शिवजी के नाम का कीर्तन रातभर गाया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नृत्य किया। शिवजी को विशेष जड़ी-बूटी न्यार की माला पहनाई गई और इसी जड़ी-बूटी से धूप अर्पित की गई। मान्यता है कि इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। श्रद्धालुओं ने शिवजी को मीठे रोट, रोट और भले अर्पित किए, जिसे प्रसाद के रूप में कई दिनों तक ग्रहण किया जाता है। शिवजी के गूर टेक चंद ने बताया कि खारका उत्सव नाचन और सराज घाटी की प्राचीन संस्कृति को संजोए हुए है और यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है। संवाद