गोहर (मंडी)। जिसा की लोअर बेल्ट में अर्ली वैरायटी का सेब सीजन अंतिम चरण में है। मगर एचपीएमसी ने अभी तक सेब खरीद के लिए अपने सेंटर तक नहीं खोले हैं। इस साल सेब की कम फसल के चलते एचपीएमसी के सेल सेंटरों में सेब कम आना भी इसका कारण हो सकता है। मगर बागवानों में एचपीएमसी के सेल सेंटर न खुलने से भारी आक्रोश है।
जिला के सेब उत्पादित क्षेत्रों में ओलों की मार और बारिश ठंड से खराब सेब टनों के हिसाब से एचपीएमसी के सेल सेंटरों में पहुंचता है। एचपीएमसी खरीद किए गए सेब का एप्पल जूस तैयार करता है। बागवानों चंद्रमनी, रमेश, राम लाल, तपेंद्र, मोहन, लाला राम, हरनाम, पवन, जगदीश, हेमराज, लाभ सिंह, दीवान चंद, नेत्र सिंह और भगवान दास ने बताया कि वे ओलों से खराब और गोल्डन सेब एचपीएमसी को देंगे। इस बार दिल्ली आजादपुर मंडी में सेब के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। इससे बागवान दिल्ली मंडी जाने से हाथ पीछे करने लगे है। स्पर और नई वैरायटियों का सेब मंडियों में हाथों हाथ बिक रहा है। वहीं, एचपीएमसी चिंडी के प्रभारी झाबर सिंह ने बताया कि सेल सेंटर खोलने के आदेश सरकार की तरफ से मिलते हैं। अभी तक इस संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं मिले हैं।
बॉक्स
इन क्षेत्रों मे होता है सेब उत्पादन
जिला में करसोग, चुराग, चरखडी, पांगणा, शकोहर, थमाड़ी, रोहांडा, बाढ़ू, घीड़ी, कुटाहची, सरोआ, फंग्यार, जहल, धंग्यारा, सलाहर, काढ़ा, बगस्याड, थुनाग, जंजैहली, छतरी, पंजाई, थाची और द्रंग क्षेत्रों में सेब की पैदावार होती है। मंडी जिला में 35 लाख सेब पेटी उत्पादन होता है। मगर इस बार सेब की फसल 15 से 20 फीसदी है। नाचन फल सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष बीके ठाकुर और उपाध्यक्ष प्रेम ठाकुर ने कहा है कि अगर एचपीएमसी जल्द अपने सेल सेंटर नहीं खोलती है तो बागवान संघ आंदोलन का रुख अख्तियार करेगा।
12 रुपये प्रति किलो तय किया है समर्थन मूल्य
सरकार ने एचपीएमसी के तहत सेब का समर्थन मूल्य 12 रुपये प्रति किलो तय किया है। मगर सेल सेंटर न खुलने से बागवानों में भारी आक्रोश है। मंडी जिला में एचपीएमसी के सेल सेंटर चिंडी, महासुधार, सेरी, जड़ोल, छतरी, चैलचौक और बगस्याड़ में हैं। जहां सरकार के आदेश मिलने पर खरीद की जाती है।