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अभियोग साबित नहीं होने पर दुराचार के आरोपी बरी

Wed, 06 Apr 2016 11:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी
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नाबालिग से दुराचार का अभियोग साबित नहीं होने पर अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया है। आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी करने के आदेश दिये हैं।
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलदेव सिंह की विशेष अदालत ने सदर तहसील के सिंहनाल (बिजणी) निवासी प्रवीन कुमार के खिलाफ भादंसं की धारा 376, 323, 506 व पोक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत और सुहड़ा मुहल्ला निवासी मोहित बंसल पुत्र देव राज के खिलाफ भादंस की धारा 363 के तहत अभियोग साबित न होने पर उन्हे बरी करने का फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार नाबालिग पीड़िता एक निजी स्कूल में पढ़ रही थी। वह साथ ही एक गली में ट्यूशन पढ़ने जाती थी। 6 मार्च, 2015 को पीड़िता के घर न लौटने पर परिजनों ने संदेह के आधार पर आरोपी मोहित के खिलाफ प्राथमिक दर्ज करवाई थी।

आरोपी मोहित भी सात मार्च से गायब था। मामले की तहकीकात में पता चला कि उस रोज पीड़िता ट्यूशन नहीं गई थी बल्कि वह मोहित के साथ घूमने के लिए कमांद की ओर चली गई थी। जब दोनों कमांद में एक पत्थर पर बैठे थे तो इसी दौरान आरोपी प्रवीण कुमार हाथ में डंडा लेकर वहां आया और पीड़िता व आरोपी मोहित से मारपीट करने लग गया। प्रवीण ने उन दोनों को वहां से जाने से रोक दिया और उन्हे इसके बदले एक लाख रुपये अदा करने को कहा। उनके पास राशि न होने के कारण आरोपी प्रवीण ने मोहित को पैसों का इंतजाम करने के लिए भेज दिया।
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इस दौरान आरोपी प्रवीण ने मोहित के जाने के बाद नाबालिग से जबरन दुराचार किया। कुछ समय बाद मोहित व अन्य लोगों के मौका स्थल पर पहुंचते ही आरोपी प्रवीण वहां से फरार हो गया। इस घटना में डर व शर्म के कारण पीड़िता अपने घर वापस नहीं गई और आरोपी मोहित के साथ पंजाब चली गई। पुलिस जांच के दौरान पीड़िता और आरोपी मोहित पंजाब के फरीदकोट में मिले थे। पुलिस ने इन मामले में प्रवीण और मोहित को नामजद करते हुए अदालत में अभियोग चलाया था।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपियों के खिलाफ संदेह की छाया से दूर अभियोग साबित नहीं हुआ है। इस कारण अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए उन्हे बरी करने का फैसला सुनाया है।
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