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घरों में ठूंस-ठूंस कर रखी घास बनी बारूद, गांव स्वाह

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गोहर/जंजैहली (मंडी)। बालीचौकी क्षेत्र के डाहर अग्निकांड से लोगों की जिंदगी भर की कमाई चंद घंटों में राख हो गई। सर्दियों के लिए मकानों में ठूंस-ठूंस कर भरी सूखी घास और लकड़ी ने बारूद का रूप धारण कर बालीचौक तहसील के डाहर गांव को पल भर में राख के ढेर में तबदील कर दिया। सिराज घाटी में कई दशकों से घरों में ठूंस ठूंस कर सूखी घास और लकड़ियां रखने की प्राचीन परंपरा है। जिसने अनेक बार लोगों के आशियानों को राख कर दिया है। मगर बर्फबारी और ठंड में चारे के संकट से बचने के लिए लोग अपने घरों की छतों में सूखा घास और ठंड से बचने के लिए लकड़ियां रखकर जरा सी लापरवाही करके अपने सामने सपनों के आशियाने को धू धू कर जलता देखते हैं। मगर अभी तक इस समस्या का सिराज घाटी के लोग कोई समाधान नहीं निकाल सके हैं। मंगलवार को जिस प्रकार से डाहर गांव में अमंगल हुआ, वह घरों में रखे सूखे घास और लकड़ी का ही कारनामा है। एक साथ बने डाहर गांव के मकानों को आग से बचाने का ग्रामीणों को मौका तक नहीं मिला। अपनी आंखों के सामने घरों की छत से निकल रहे धुएं और आग की लपटों को देख अनेक ग्रामीण गश खाकर गिर पड़े और गांव की महिलाएं और बच्चे फूट फूट कर रोते रहे। मगर सब कुछ राख हो गया।
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बेघर परिवारों को 15-15 हजार की फौरी राहत
प्रशासन की ओर से बेघर परिवारों को 15-15 हजार की फौरी राहत के रूप में दिए गए और ग्रामीणों को रहने के लिए कंबल और टेंट की व्यवस्था की गई है। वहीं अनेक समाज सेवी और एनजीओ डाहर गांव के प्रभावित परिवारों की मदद के लिए पहुंच गए हैं। बुधवार दिन भर डाहर गांव के लोग राख में अपने आशियाने को तलाश करते रहे। गांव डाहर में भीषण अग्निकांड से 33 मकान और 16 गौशालाएं जलकर राख हो गई हैं। जिसमें 33 परिवारों के 122 सदस्य बेघर हो गए हैं। डाहर गांव में करीब 3 करोड़ का नुकसान हुआ है। सिराज घाटी में डाहर गांव से पूर्व थुनाग का केऊली गांव भी आग की घटना से राख हो गया था। एसडीएम गोहर राघव शर्मा ने बताया कि प्रशासन पीड़ित परिवारों की हर संभव मदद कर रहा है।
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