मंडी। अपीलीय अदालत ने चेक बाउंस का अभियोग साबित न होने पर आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। अदालत ने अधीनस्थ न्यायालय द्वारा सुनाए गए सजा के फैसले को निरस्त करने का आदेश दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एक) की अपीलीय अदालत ने बल्ह तहसील के लुनापाणी गांव निवासी धर्म सिंह पुत्र गटु राम को निगोशिएबल इन्स्ट्रुमेंट की धारा 138 के तहत चलाए गए अभियोग से बरी करने का फैसला सुनाया है। अधीनस्थ न्यायालय ने बल्ह तहसील के सोयरा गांव निवासी जसबीर सिंह पुत्र अवतार सिंह की शिकायत पर चलाए अभियोग में आरोपी को छह माह के साधारण कारावास और एक लाख दस हजार रुपये हर्जाने की सजा का फैसला सुनाया था।
आरोपी ने अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को अधिवक्ता पुष्प राज के माध्यम से अपीलीय अदालत में चुनौती दी थी। अपीलीय अदालत ने आरोपी की अपील पर सुनवाई के बाद अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता ने अधीनस्थ न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत शपथ पत्र में कहा था कि कि उसे चेक बाउंस का मेमो 16 दिसंबर 2014 को प्राप्त हुआ था। लेकिन आरोपी के बैंक की ओर से जारी चेक बाउंस के मेमो में यह स्पष्ट है कि इसे 9 दिसंबर 2014 को जारी किया था। शिकायतकर्ता से की गई जिरह के दौरान उसने कहा था कि इसे यह मेमो 9 दिसंबर 2014 को प्राप्त हुआ था। ऐसे में शिकायतकर्ता ने बैंक से जारी तिथि को ही यह मेमो प्राप्त हुआ माना है।
इससे साबित होता है कि शिकायतकर्ता को चेक बाउंस का मेमो 9 दिसंबर को ही मिला था। शिकायतकर्ता की ओर से ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित होता हो कि चेक बाउंस का मेमो 16 दिसंबर को प्राप्त हुआ हो। अपीलीय अदालत ने अधीनस्थ न्यायालय के परिणामों को गलत माना।