हिमाचल किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष कुशाल भारद्वाज ने कहा कि ठाना पलौन विद्युत परियोजना से विस्थापित होने वाले किसानों को अगर उचित मुआवजा न मिला तो निर्माण कार्य भी बंद करवाने से गुरेज नहीं किया जाएगा। मंगलवार को किसान सभा कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम जोगिंद्रनगर से मुलाकात कर मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा।
कुशाल भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल सरकार बहुद्देशीय योजना एवं विद्युत विभाग के द्वारा जारी अधिसूचना होने के बाद प्रभावित परिवारों में रोष है। उन्होंने बताया कि भूमि के सर्कल रेट के आधार पर पटवार वृत चड़ोंझ में एक बीघा भूमि का मूल्य 85 हजार रुपये दर्ज किया गया है, जबकि संबंधित विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित किसान परिवारों से निजी भूमि अधिग्रहण के मूल्य 8700 रुपये प्रति विश्वांसी दर्शाया गया था। इसके आधार पर एक बीघा भूमि की कीमत 34,80,000 रुपये के लगभग बताई थी। उसी आधार पर किसानों ने अपनी निजी भूमि प्रोजेक्ट निर्माण के लिए देने के लिए सहमति में हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने कहा कि पटवार वृत चड़ोंझ के रोपडू, बल्ह व बनवार मुहाल में सन 2013 व सन 2018 में कुछ किसानों की प्रति किसान एक से दो बिस्वा जमीन अधिग्रहित की गई थी। जिसका प्रति बिस्वा 1.10 लाख रुपये मुआवजा दिया गया था। यदि उस मूल्य को भी आधार माना जाए तो भी एक बीघा भूमि की कीमत लगभग 22 लाख रुपये बनती है।
इस मौके पर किसान सभा की ठाणा पलौन प्रोजेक्ट प्रभावित क्षेत्र कमेटी के प्रधान मनोहर लाल ठाकुर, सेवानिवृत एएसआई देवेंद्र सिंह ठाकुर, पूर्व सैनिक किशन सिंह, गोवर्धन सिंह, जयवंती देवी, डोलमा देवी, रीता देवी, हिम्मत राम, राजेंद्र, तीर्थ राम, राधा देवी, मंजू देवी, हेम सिंह, नीलमा देवी, राधा देवी सहित कई प्रभावित किसान भी उपस्थित रहे। उधर, एसडीएम जोगिंद्रनगर मनीश चौधरी ने बताया कि ज्ञापन को उचित माध्यम से सरकार को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा जा रहा है।