अमर उजाला ब्यूरो
जंजैहली (मंडी)। देवी-देवताओं की समृद्ध संस्कृति संजोए सिराजघाटी में जमाव बिंदु पर बर्फीले पानी में स्नान करने की परीक्षा में देव गढवालू के नए गूर सफल हुए हैं। सराज के बायला गांव के देवता गढ़वालू को गणेश का स्वरूप ही माना जाता है। सामूहिक श्रमदान से करीब 7 किलो चांदी का इनका रथ बन कर तैयार है, जिसकी प्रतिष्ठा आगामी संक्रांति को होने वाली है। कार्यक्रम में सराज के सभी देवी-देवता के गूर और पुजारियों को न्योता दे दिया गया है। इसमें देव बायला नरायण और देवी जालपा भी शामिल होंगे। देवी-देवताओं के साथ इस समागम में सैकड़ों लोग नव निर्मित देवता के रथ का दर्शन करेंगे और देवता का आशीर्वाद लेंगे। इसके लिए बायला गांव के लोग श्रमदान से धाम का आयोजन कर रहे हैं। वीरवार रात को नव निर्मित देव गढ़वालू के रथ की प्रतिष्ठा का कार्यक्रम शुरू हो जाएगा। इसके लिए देवता के नए गूर कुशम ठाकुर को गूर बनने से पहले एक तीर्थ नहाना जरूरी था। उन्होंने बताया कि तत्तापानी और मणिकर्ण के गरम पानी को छोड़ सराज के एक मात्र तीर्थ बूढ़ा केदार में नहाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। गूर ने मंगलवार को 2 फीट बर्फीले रास्ते से गुजर कर माइनस डिग्री तापमान में इस परीक्षा को देकर लक्ष्य को पूरा किया। इसके अलावा उन्हें और भी कई परंपराओं से गुजरना पड़ेगा और बाद में विधिवत रूप से उन्हें गूर बनाया जाएगा।