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अब बच्चे फिर से पढ़ पाएंगे दादी-नानी की कहानियां

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सुंदरनगर (मंडी)। एक दौर था जब बच्चों का मनोरंजन करने के लिए दादी-नानी रोज कहानियां सुना कर उन्हें सीख दिया करती थी। बच्चों में भी कहानियां सुनने का बड़ा चाव रहता था। इसके लिए वह अपनी दादी या नानी के पास ही सोया करते थे। लेकिन, सेटेलाइट टीवी के साथ टूजी, थ्रीजी और फोरजी के दौर में यह कहानियां अतीत बन कर रह गई हैं। अब बच्चे दादी-नानी से कहानियां नहीं सुनते हैं बल्कि, घर में स्मार्टफोन पर ही व्यस्त रहते हैं। लेकिन, दादी-नानी की कहानियां कहीं वर्तमान दौर में बिसरा न दी जाएं, ऐसे में उनके संरक्षण में सुंदरनगर के महादेव निवासी साहित्यकार कृष्ण चंद महादेविया आगे आए हैं। उन्होंने करीब एक दशक की रिसर्च के बाद 62 लोक कथाओं का एक गुलदस्ता तैयार किया है, जिन्हें संजोकर पहली बार सूबे में हिमाचल लोक साहित्य में लोक लघु कथाएं नाम से एक किताब में प्रकाशित हुई है। इन लोक लघु कथाओं को मूल रूप से मंडयाली भाषा में प्रकाशित किया गया है लेकिन, जिन्हें ठेठ मंडयाली समझ में नहीं आती है उनके लिए इन सभी 62 कथा-कहानियों का हिंदी में भी अनुवाद किया गया है। कृष्ण चंद महादेविया वर्तमान में खंड विकास अधिकारी कार्यालय पधर में अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले 1992 में उग्रवादी और 2013 में बेटी का दर्द विषय को लेकर उनकी किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें बेहद सराहना मिली है। इसके अलावा उनकी हिमाचली भाषा में दो एकांकी संग्रह ढेका नंगारा (1990), स्यों घ्याड़े गए (2008), हिमाचली लोकोक्तियां (1999), मंडी जनपद के लोक नाट्य रूप (2012) और मंडी जनपद में लोक मुक्तक गीत(2016) और लोक साहित्य का भी प्रकाशन हो चुका है। कृष्ण चंद महादेविया ने बताया कि दादी से प्रेरणा लेकर लोक साहित्य व लघु कथाओं के संरक्षण के प्रति उनका जो लगाव बचपन में शुरू हुआ वह अब 58 साल की उम्र में भी पत्नी नर्वदा के सहयोग से जारी है। सुकेत साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष गंगा राम राजी ने कृष्ण चंद महादेवियां के इस प्रयास की सराहना की है।
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