अमर उजाला ब्यूरो
नगवाईं (मंडी)। मनाली-चंडीगढ़ फोरलेन प्रभावित अब प्रदेश की नई भाजपा सरकार से भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों को पूरी तरह से लागू करने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। प्रभावितों का कहना है कि अभी तक प्रदेश में फोरलेन के लिए जो भी जमीन और भवन अधिग्रहीत किए गए हैं, उसमें पुनर्वास और पुनर्स्थापन के प्रावधान को कहीं भी लागू नहीं किया गया है। प्रभावितों का कहना है कि पहली अप्रैल 2015 को प्रदेश सरकार ने फैक्टर एक लागू करके प्रभावितों को चार गुणा मुआवजे के केंद्र सरकार के एलान पर पानी फेर दिया। प्रभावित इस अधिसूचना को गैरकानूनी बता रहे हैं क्योंकि एक मामले में बांबे हाईकोर्ट अपना निर्णय दे चुका है कि भूमि अधिग्रहण मामले में कम से कम फैक्टर 2 लगाना ही होगा तथा चार गुणा से कम मुआवजा नहीं दिया जा सकता। मांग की जा रही है कि इस अधिसूचना को सरकार तुरंत प्रभाव से गैरकानूनी करार देकर उसी तारीख से फैक्टर 2 लागू करके राहत प्रदान करे। पुनर्वास और पुनर्स्थापन में हर प्रभावित परिवार के एक सदस्य को नौकरी या इसके बदले में पांच लाख रुपए मुआवजे का प्रावधान है मगर प्रदेश सरकार ने अभी इस दिशा में कोई काम नहीं किया है। अधिनियम में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रभावितों को जमीन के बदले जमीन और मकान के बदले मकान देने का प्रावधान है। लेकिन इस दिशा में भी कोई चयन अभी तक नहीं किया गया। प्रदेश सरकार पुनर्वास और पुनर्स्थापन को लेकर नवंबर 2015 में अधिसूचना जारी कर चुकी है। संबंधित एसडीएम और एडीएम को स्थानीय स्तर पर प्रशासक तथा कलेक्टर की शक्तयिां दे रखी हैं लेकिन इस दिशा में भी कोई काम अभी तक नहीं हुआ है। इसके बारे में फोरलेन संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर (सेवानिवृत्त) का कहना है कि पूर्व सरकार ने ढाई साल तक कई बैठकें कीं। बैठक में उनकी हर बात को माना गया लेकिन किसी पर भी अमल नहीं हुआ। वर्तमान सरकार से प्रदेश के फोरलेन प्रभावितों को बहुत उम्मीदें हैं।