पधर (मंडी)। कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली द्रंग सीट इस बार के चुनावों में किसी हॉट सीट से कम नहीं आंकी जा सकती। इस बार तीन ठाकुरों के बीच द्रंग से रोचक मुकाबला होना नामांकन के बाद तय हो गया है। 1977 के बाद नब्बे के दशक में मात्र ढाई वर्ष के कार्यकाल को छोड़ द्रंग सीट कौल सिंह ठाकुर का गढ़ मानी जाती रही है। आठ बार जीत दर्ज कर नौंवी पारी खेलने के लिए चुनाव मैदान में हैं। पिछले तीन चुनावों में से गत दो चुनावों में कांटे की टक्कर देने वाले जवाहर ठाकुर पर इस बार भाजपा ने एक बार फिर दांव खेला है। कभी स्वास्थ्य मंत्री के खासमखास रहे और कांग्रेस सरकार के इस कार्यकाल में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी रहे पूर्ण चंद ठाकुर भी कौल सिंह की बगावत में उतर कर आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए हैं। तीन ठाकुरों के बीच चुनावी जंग इस बार द्रंग में नया रंग ला सकती है। वीरवार को नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन द्रंग निर्वाचन क्षेत्र से किसी भी आजाद उम्मीदवार की ओर से नामांकन वापस न लेने से राष्ट्रीय पार्टियों सहित अब छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में डटे हैं। चुनावी गलियारों में इस बात की चर्चा खूब चल रही है। कौल सिंह ठाकुर का कद द्रंग की राजनीति में किसी से छुपा नहीं। साधारण व्यक्तित्व रखने वाले भाजपा प्रत्याशी जवाहर ठाकुर का यह चुनाव अंतिम माना जा रहा है, वहीं आजाद प्रत्याशी पूर्ण चंद ठाकुर कांग्रेस और भाजपा में से किस प्रत्याशी के चुनावों में समीकरण बिगाड़ते हैं, इस बात की भी चर्चा क्षेत्र में आम हो गई है।