करसोग (मंडी)। करसोग घाटी में बारिश न होने से किसानों और बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। जिन किसानों ने खर्च करके फसलें बीज दी हैं, उनकी फसलें सूखकर पीली पड़ गई हैं। वहीं, जिन्होंने अब तक फसलें नहीं बीजी हैं उनके चेहरे पर भी मायूसी झलक रही है। किसानों को रोजी-रोटी की चिंता सता रही है। बारिश न होने से करीब 70 प्रतिशत किसान अपने खेतों में नकदी फसलों की बिजाई नहीं कर पाए हैं। सुबह के वक्त आसमान पर हल्के बादल देखकर किसानों को बारिश की आस जग जाती है तो दूसरे पल ही उनकी यह उम्मीद टूट जाती है। किसानों में रमेश, मोहनलाल, भगतराम, भीमसिंह, भदरूराम, गीताराम, राजेंद्र कुमार आदि का कहना है कि बारिश न होने से गेहूं, मटर और दालों की बिजाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। करसोग में आजीविका का मुख्य साधन खेतीबाड़ी है अगर बारिश न हुई तो किसानों की हालत पतली हो जाएगी। अब किसानों को क्षेत्र के देवी-देवताओं पर ही विश्वास है कि वे जल्द ही बारिश करेंगे।