पधर (मंडी)। चौहारघाटी के बड़ादेव भगवान श्री कृष्ण के अवतार देव हुरंग नारायण ने हुरंग काहिका उत्सव के दूसरे दिन हस्तपुर, हस्तिनापुर, चौहारघाटी, अमरगढ़ चौहारघाटी, देवगढ़ चौहारघाटी के सभी सात मेहमान देवताओं का जोरदार स्वागत किया। चौहारघाटी के सभी देवताओं के हुरंग गांव में आगमन से देव हुरंग नारायण स्थली देवमयी हो गई। हजारों की संख्या में श्रद्धालु देव आस्था के इस पवित्र त्योहार के प्रत्यक्षदर्शी बनें। काहिका उत्सव में सबसे पहले देव हुरंग नारायण के डांगु देव पेखर गहरी पहुंचे। सबसे अंत में देव हुरंग नारायण के बड़े भाई भगवान बलराम रूपी देव कड़ौनी नारायण पहुंचे। काहिका उत्सव के दूसरे दिन सबसे पहले देव हुरंग नारायण का छिद्रा हुआ। उसके बाद घाटी के समस्त सात देवताओं में से सबसे अंत में घाटी के बजीर देव पशाकोट का नरवेदी पंडितों के हाथों छिद्रा हुआ। देव कारदार कमेटी पधर उपमंडल के अध्यक्ष लेख राम ठाकुर, देव हुरंग नारायण के पुजारी इंद्र सिंह, बड़ा गुर महल, छोटा गुर राम सिंह, ज्येष्ठ कारदार नारायणु, नड़ सोम दत उर्फ गुड्डू, काहिका के मुख्य नड़ पवन कुमार ने बताया कि यह धार्मिक उत्सव बड़ा देव भगवान कृष्ण रूपी हुरंग नारायण को समर्पित है। कारदारों ने बताया कि काहिका में देव परंपरा को देव हुरंग नारायण की आज्ञा के अनुसार निभाया जाएगा। शुक्रवार को देव शक्ति से नड़ पवन कुमार मृत देव को प्राप्त होंगे। बाद में उनका जनाजा पूरे गांव में घुमाया जाएगा। काहिका की अंतिम कड़ी में नड़ परिवार के सभी सदस्य नड़ पवन कुमार के मृत देह से बाहर करने की गुहार लगाएंगे। बेहोशी में नड़ को हुरंग नारायण के पास लाया जाएगा। देवता के आशीर्वाद से नड़ मर कर जिंदा हो जाएगा। देवमयी चमत्कार को प्रत्यक्ष रूप से देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु हुरंग गांव में उपस्थित रहेंगे।
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