सुंदरनगर (मंडी)। उपमंडल के प्रसिद्ध सतवाड़ा देव नालनी करीब सात वर्षों के अंतराल के बाद अपने क्षेत्र के 70 थड़ों के भ्रमण के लिए 26 दिसंबर से दो माह के लिए अपने मूल स्थान नालनी से प्रस्थान करेंगे। देवता के आगमन को लेकर श्रद्धालु लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। सतवाड़ा देव हर पांच सालों के बाद अपने थड़ों के भ्रमण पर निकलते थे लेकिन इस बार देवता सात साल के बाद निकल रहे हैं, ऐसे में उनके श्रद्धालुओं में उनके आगमन को लेकर खासा उत्साह है। जनपद में सतवाड़ा देव के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। इस दौरान उनके श्रद्धालुओं की ओर से मांगी गई मन्नतें पूरी होने पर वे उनकी मन्नतें भी देवता को अर्पित करते हैं। इसके साथ ही देवता अपने भक्तों का आतिथ्य भी स्वीकार करते हैं। श्रद्धालु देवता के साथ आने वाले देवलुओं का भी स्वागत करते हैं। देवता के विभिन्न थड़ों पर भक्तों की ओर से मंदिरों का निर्माण किया गया है। देवता के आगमन पर देवता अपने थड़े पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। सतवाड़ा देव मंदिर कमेटी नालनी के प्रधान शिवशरण ने बताया कि यात्रा 26 दिसंबर से नालनी से शुरू होगी। यह यात्रा मलोह, भनवाड़, फागला, भवाना, बोबर, कंदार, सेऊ, सलापड़, कांगू, डैहर, बैहना से होती हुई सरकाघाट के कोट हटली से सुंदरनगर के सलवाणा, जांबला, चहड़ी, किहुंची, जड़ोल, रोपड़ी, बायला, कुराड़ा, अप्पर सिहली, लोअर सिहली, मलिड़ी, तलसाई, चुरढ़, बनेड़, भड़ोह, बनायक, भरजवाणू, छात्तर, कनैड, निचला चौक, भराड़ी, चांबी, मेहाली, फगवाओ, मनाणी, फूफाणा, डोलधार से होते हुए दो माह के बाद अपने मूल स्थान नालनी पहुंचेगी। प्रधान शिवशरण, गूर ताराचंद, पुजारी हेमराज, देवता कमेटी के उप्र धान चूड़ामणि, सचिव रूपलाल तथा नंदलाल कटवाल सहित अन्य देवता के कारिंदों ने बताया कि देवता के भ्रमण को लेकर श्रद्धालुओं का इंतजार सात वर्ष बाद खत्म होगा।