जोगिंद्रनगर (मंडी)। पंचपर्व यानी धनतेरस, नरक चौदश, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज भारत में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं। सभी दिनों में सभी पर्वों पर अलग-अलग देवी देवताओं की पूजा की जाती है और सभी से सुख शांति की कामना की जाती है। जोगिंद्रनगर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. लेखराज शर्मा ने बताया कि दीपावली पर्व 7 नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक कृष्ण अमावस्या को दीपावली एवं लक्ष्मी जी की पूजा करने का विधान महालक्ष्मी पूजा कहलाता है। इस दिन श्रीगणेश, सरस्वती और कुबेर आदि की पूजा करना भी शुभ रहता है। उन्होंने बताया कि भूमुहूर्त, गोधूलि बेला अथवा स्थिर लग्न, प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा का कार्य प्रारंभ करना चाहिए। दुकानों, घरों में फूल माला द्वार पर लगानी चाहिए। एक दीपक शुद्ध देसी घी का पूरी रात भर घर में पूजा स्थान पर जलाना चाहिए। लक्ष्मी जी को अष्टदल कमल बना कर विराजित करना चाहिए। दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी के सम्मुख श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त तथा लक्ष्मी स्तत्रादि का पाठ, जप भजन कर लक्ष्मी जी को प्रसन्न करना चाहिए। जहां लक्ष्मी की पूजा हो वहां घंटा नहीं बजना चाहिए। इस वर्ष कार्तिक कृष्ण अमावस 7 नवंबर 2018, बुधवार को है। श्री लक्ष्मी पूजा के लिए स्थिर लग्न, प्रदोष काल, निशीथ काल और महानिशीथ काल होना बहुत अच्छा होता है। इस काल में लक्ष्मी का पूजन करना स्वास्थ्य में सुधार, धन वृद्धि, आर्थिक उन्नति तथा बुद्धि विवेक में वृद्धि करता है। इस वर्ष कार्यकाल दुकान बगैरह के लिए पूजा का मुहूर्त सायं 05:57 से 07:52 तक सही है। इसमें बही खाते का नवीनीकरण किया जा सकता है। गृहस्थ लोगों के लिए सबसे उत्तम समय शाम 07:10 से 08:57 तक होगा। इस शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी का पूजन करके लक्ष्मी, धान्या लक्ष्मी, धैर्या लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, सन्तान लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, धन लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी की अनुकम्पा प्राप्त कर सकते हैं। रात्रि 11:12 से आधी रात्रि 11:59 तक महानिशीथ काल होगा। इसमें जप अनुष्ठान करना श्री लक्ष्मी, महाशक्ति काली उपासना, यन्त्र तन्त्र तथा तान्त्रिक अनुष्ठान एवं साधनाएं की जाती हैं।
00