अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। शिक्षा विभाग ने जिले के निजी स्कूलों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी किए हैं। यदि निजी स्कूल प्रबंधन इन निर्देशों पर संजीदगी नहीं दिखाते हैं तो आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए इन स्कूलों की मान्यता पर भी तलवार लटक सकती है। इन निर्देशों में यौन उत्पीड़न और अन्य अपराधों को कम करने पर जोर दिया गया है। इन अपराधों की रोकथाम के लिए स्कूल की बस सुविधा में काफी बदलाव कर नए नियम लागू किए गए हैं, जिनका निजी स्कूलों को कड़ाई से पालन करना होगा। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक मंडी ने इस बाबत निजी स्कूल प्रबंधकों को लिखित आदेश जारी किए है। निर्देशों के साथ स्कूलों को कोर्ट के आदेशों की प्रति भी संलग्न की गई है। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक केडी शर्मा ने कहा कि मंडी के सभी निजी स्कूलों को सूचित किया कर दिया है। कहा कि विद्यालय परिसर और स्कूल जाने वाले बच्चों पर यौन उत्पीड़न, बलात्कार और अन्य अपराधों की रोकथाम के संबंध में स्कूलों में बाल सुरक्षा के बारे में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का पालन करें (जिसकी प्रतिलिपि संलग्न है)। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अनुपालन शपथ पत्र इस कार्यालय को एक सप्ताह के अंदर जमा करें। अगर कोई निजी स्कूल इस कार्यालय में शपथ पत्र देने में असमर्थ रहता है तो ऐसी पाठशालाओं को शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए मान्यता प्रदान नहीं की जाएगी।
ये हैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश
-बिना आईडी कार्ड के छुट्टी के बाद किसी को बच्चे न सौंपे जाएं।
-स्कूल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाएं जाएं
-सीनियर सेक्शन को जूनियर सेक्शन से अलग रखा जाए
-नाबालिग छात्रा को पुरुष स्टाफ के साथ अकेला न छोड़ा जाए
-स्कूल में पुरुष एवं महिला शौचालय उचित दूरी पर हों और लड़कियों के टॉयलेट में महिला सहायक तैनात हो
-स्कूल स्टाफ की तैनाती से पहले पुलिस वेरिफिकेशन
-स्कूल के समय के दौरान में पुरुष और महिला सुरक्षा कर्मी की तैनाती
-बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए शिफ्ट के आधार पर स्टाफ की तैनाती
-स्कूल में तीन बार सुबह, दोपहर और छुट्टी के वक्त हाजिरी
-स्कूल बस पर स्कूल का संपर्क नंबर अंकित होना चाहिए
-स्कूल बस में सहायक की तैनाती की जाए
-स्कूल बस चालक के लिए पांच वर्ष का अनुभव अनिवार्य
-स्कूल परिसर में डूज और डोंट का साइन बोर्ड लगाना