जोगिंद्रनगर (मंडी)। शारदा ज्योतिष निकेतन जोगिंद्रनगर के संस्थापक कैप्टन डा. लेखराज शर्मा ने कहा कि वैसे तो दीपावली के पांच दिवस मुख्य है, किंतु सभी बातों के संयोग से यह पर्व कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, धनतेरस से नरक चौदश, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज इन पांच दिनों तक देश के कोने-कोने में धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष दिवाली का ज्योति पर्व 19 अक्तूबर को मनाया जाएगा। गृहस्थ लोगों के लिए सबसे उत्तम समय शाम 8:22 से 10:53 तक होगा। इस शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी का पूजन करके धान्य लक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, धन लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी की अनुकंपा प्राप्त कर सकते हैं। इसमें स्थिर लग्न वृष, प्रदोष काल तथा शुभ चौघड़ियां का संयोग होना अति श्रेष्ठ है। रात्रि 11:22 से आधी रात्रि 03:45 तक महानिशीथ काल होगा। इसमें जप अनुष्ठान करना श्री लक्ष्मी, महाशक्ति काली उपासना, यंत्र तथा तांत्रिक अनुष्ठान एवं साधनाएं की जाती हैं। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी धनतेरस को यमराज को दीप दान करना चाहिए। इस दिन सोने-चांदी के आभूषण और बर्तन खरीदने का भी प्रचलन है। व्यापारी वर्ग बही खाते की पूजा करते हैं। कार्तिक कृष्ण अमावस्या को दीपावली एवं लक्ष्मी जी की पूजा करने के विधान को महालक्ष्मी पूजा कहा जाता है। इस दिन श्री गणेश, सरस्वती और कुबेर आदि की पूजा करनी चाहिए। दीपावली से पूर्व घरों, प्रतिष्ठानों की साफ सफाई, रंगाई पुताई, रोशनी और सजावट आदि की जाती है। घर आंगन में रंगोली बनाई जाती है। शुभ मुहूर्त, गोदुली बेला अथवा स्थिर लग्न, प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा का कार्य प्रारंभ करना चाहिए। दुकानों घरों में द्वार फूल मालाओं से सजाने चाहिए। एक दीपक शुद्ध देसी घी का पूरी रात भर घर में पूजा स्थान पर जलाना चाहिए। लक्ष्मी जी को अष्टदल कमल बना कर विराजित करना चाहिए। शोड शोपचार से श्रद्धा भक्तिपूर्वक सपरिवार लक्ष्मी जी की पूजा करनी चाहिए। ऊं चपालायै चंचलायै, कमलायै, कात्यादिन्यै, जगन्मात्रै, विष्वल्लभायै, कमलवासिन्यै, पमकमलायै और श्रियै नम: का उच्चारण कर क्रमश: पाद, जानु, कमर, नाभि, वक्षस्थल, भुजाओं, नेत्रों और सिर की पूजा करनी चाहिए। दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी के सम्मुख लक्ष्मी सूक्त तथा लक्ष्मी स्तत्रादि का पाठ, जप, भजन कर लक्ष्मी जी को प्रसन्न करना चाहिए।