सुंदरनगर (मंडी)। दस माह के लंबे इंतजार के बाद सुंदरनगर के बीएसएल जलाशय में सिल्ट निकासी का काम शुरू हो गया है। बीएसएल प्रबंधन ने सिल्ट निकालने के काम को अपने तीनों ड्रेजर लगा दिया है। बीएसएल जलाशय में इस समय 600 एकड़ फीट सिल्ट जमा है। सिल्ट निकासी के लिए जो तीन ड्रेजर एक साथ लगाए गए हैं उनकी सिल्ट निकासी की क्षमता 700 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा है। बीएसएल प्रबंधन इसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुझावों पर अमल बता रहा है। लेकिन, दूसरी ओर जलाशय में दो ड्रेजरों के काम करने से पहले ही दिन सुकेती खड्ड में सिल्ट की बाढ़ आ गई। बारिश होने की स्थिति में खड्ड का जलस्तर बढ़ने से इसमें बहकर आने वाली सिल्ट बल्ह घाटी के खेत-खलिहानों में दोगुनी मार कर सकती है। इसके चलते घाटी के किसानों में प्रबंधन के प्रति रोष पनप रहा है। वहीं सिल्ट फेंकने के पहले ही दिन पिछले दस माह से खड्ड में पल रही मछलियां तथा अन्य जलचर अकाल मौत का ग्रास बन गए हैं। सुंदरनगर के बीएसएल जलाशय से निकलने वाली सिल्ट के स्थायी समाधान के लिए प्रदेश के उच्च न्यायालय ने बीएसएल प्रबंधन को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुझावों पर अमल करने को कहा है। जिसके अनुसार बरसात के तीन माह जुलाई, अगस्त और सितंबर में ही जलाशय से सिल्ट निकालने का काम किया जा सकता है। रात से सिल्ट निकासी का काम शुरू होने के पहले ही दिन सुकेती की निर्मलधार अब सिल्ट युक्त हो गई है। सिल्ट हटाओ संघर्ष समिति के प्रधान निक्का राम, किसान नेता भूपेंद्र सेन व भाजपा किसान मोरचा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामचंद्र शर्मा का कहना है कि हर वर्ष सुकेती खड्ड के किनारे रहने वाले किसानों को सिल्ट की मार झेलनी पड़ती है। इधर, बीएसएल परियोजना के मुख्य अभियंता डा. गुलाब सिंह नरवाल का कहना है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा निर्देशों पर ही सिल्ट निकासी का काम किया जा रहा है।