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रिवालसर झील में मछलियों को आहार डालने को पूर्ण प्रतिबंध

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रिवालसर (मंडी)। हिंदू, बौद्ध और सिखों की आस्था की प्रतीक रिवालसर झील वर्षों से प्रदूषण की मार झेल रही है। हर वर्ष झील में टनों के हिसाब से मछलियां मर जाती हैं। प्रदूषण का दंश झेल रही झील के जख्मों पर अब प्रशासन ने मरहम लगाना शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन ने रिवालसर झील में मछलियों के आहार डालने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। धार्मिक आस्था के चलते जल्द ही प्रशासन अब इसके लिए स्थान और आहार की मात्रा तय कर देगा। तय स्थान और मात्रा के अनुसार जो भी नियमों को तोड़ने का प्रयास करेगा उसको दंडित किया जाएगा। डेवलपमेंट एक्शन ग्रुप के अध्यक्ष नरेश शर्मा ने बताया कि स्थानीय नगर पंचायत के सदस्यों और इलाके की दर्जनों पंचायत प्रतिनिधियों व महिला मंडल के सहयोग से प्रशासन ने यह कदम उठाया है। एसडीएम किशोरी लाल ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से झील में प्रति वर्ष काफी संख्या में मर रही मछलियों के मरने का कारण जानने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी ने भारी मात्रा में झील में डाले जा रहा आहार को भी मछलियों के मरने का एक कारण माना है। इसके चलते प्रशासन ने अब रिवालसर झील में मछलियों को डाले जाने वाले आहार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। जल्द ही मछली पालन विभाग की ओर से झील परिसर में स्थानों का चयन व मछलियों को डाले जाने वाले आहार की मात्रा तय की जाएगी। प्रशासन के इस कदम की नगर पंचायत अध्यक्ष लाभ सिंह ठाकुर सहित सभी पार्षदों, ग्राम पंचायत लोअर रिवालसर के प्रधान संजय कुमार सहित सभी वार्ड पंचों और रिवालसर व्यापार मंडल के प्रधान ढतमेश्वर ठाकुर, रिवालसर के धार्मिक संस्थानों, महिला मंडलों ने स्वागत किया है और रिवालसर झील की दशा सुधारने के लिए एक बेहतर कदम बताया है।
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