गोहर (मंडी)। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में जहां पगडंडियों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों में लोग पैदल चलने से कतराते हैं, वहां मंडी जिले की हेल्थ वर्कर गीता वर्मा ने खसरे जैसी भयानक बीमारी के खात्मे का संकल्प लेते हुए पहाड़ों पर मोटरसाइकिल पर खसरा रूबेला टीकाकरण का बक्सा लेकर चरवाहों और गुज्जर समुदाय के बच्चों का टीकाकरण करके एक मिसाल पेश की है। इस नेक काम के लिए मंडी जिले की हेल्थ वर्कर गीता वर्मा को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने कैलेंडर में जगह देकर नारी गरिमा को बढ़ाया है। इस कठिन कार्य के लिए गीता वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के कैलेंडर पर आज भी दूसरों के लिए मिसाल बनी हुई हैं। उन्हें करसोग तहसील के सपनेट गांव में खसरा-रूबेला कार्यक्रम के दौरान बेहतर कार्य के लिए डब्ल्यूएचओ कैलेंडर में शामिल किया गया था। गीता को यह सम्मान मिलने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने संदेश में कहा था कि राज्य के लिए यह गर्व की बात है कि महिला स्वास्थ्य कर्मचारी को डब्ल्यूएचओ कैलेंडर में शामिल किया है। मंडी जिले के ब्लॉक जंजैहली में स्वास्थ्य उप केंद्र शंकरदेहरा में गीता वर्मा ने दूरस्थ गांवों में भी बच्चों को टीकाकरण करने के लिए एक अभियान चलाया था। इसमें उन्होंने दूरदराज इलाकों में चरवाहों और गुज्जर समुदाय के बच्चों का टीकाकरण किया। दुर्गम क्षेत्रों में खसरा-रूबेला टीकाकरण को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए खसरा-रूबेला टीका के बक्से के साथ मोटरसाइकिल से बेहद ही कठिन रास्ता पार करते हुए उन्होंने खसरा रुबेला अभियान को पूरा किया था। एक ग्रामीण महिला के लिए जंगलों में अकेले जाकर टीकाकरण को पूरा करना किसी जोखिम से कम नहीं था। गीता वर्मा का हौसला और काम के प्रति उसका जुनून कहीं भी हारा नहीं। विश्व के लिए हिमाचल की यह बेटी किसी प्रेरणा से कम नहीं है।