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जमीनी स्तर पर दिखा लोगों में जोश

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मंडी। बागवानी विकास परियोजना के तहत विशेषज्ञों की टीम ने तीन गांवों का दौरा किया। जिले के जंजैहली से जुड़े सुनाह, बजौण और लेह गांव के किसानों ने परियोजना के शिमला से आए दल के समक्ष सघन बागवानी से जुड़ने की मंशा खुद जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले साल सुनाह और लेह गांव के करीब 12 किसान परिवार इस परियोजना से जोड़े गए थे। सुनाह के 7 और लेह गांव के इन 5 परिवारों समेत इन दो चयनित क्लस्टर में करीब 650 अति विकसित फलों के पौधों का वितरण किया गया था । लेह गांव के चमन ठाकुर ने कहा कि सेब की बेहतर किस्म और प्रति हेक्टेयर ज्यादा पैदावार देने वाले इन फलों की वैरायटी के प्रति ग्रामीण बागवानों का रुझान बढ़ने लगा है। इन इलाकों में नए बगीचों के लगने की अपार संभावना है। सुनाह गांव की भावना ने कहा कि परियोजना में विकसित फल पौध से दो से तीन वर्षों के भीतर मिलने वाली उपज उन्हें जल्द आय का जरिया बनाने का अच्छा मकसद दे रही है। उधर, बजौण गांव के युवा जगदीश कुमार ने कहा कि सुनाह क्लस्टर के परियोजना से जुड़ने के बाद उनका भी मन है कि वे सेब की सघन बागवानी से जुड़ कर अपने लिए खुद का रोजगार गांव में पैदा करें। बजौण गांव के राम चंद्र भी परियोजना में विकसित सिंचाई योजना और बेहतर लाभ को देख कर विकसित बागवानी को अपनाने के लिए खुद उत्साहित है। बजौण गांव के ही सत्य प्रकाश ने कहा कि शिमला से आए विश्व बैंक पोषित इस परियोजना के विशेषज्ञों ने उन्हें विकसित बागवानी की कई योजनाओं की जानकारी दी।
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