कुल्लू। क्रशर बंद होने से निर्माण कार्यों के लिए ठेकेदारों को रेत, बजरी नहीं मिल रही है। इस कारण ठेकेदारों ने लोगों के निजी काम भी रोक दिए हैं। कई जगहों पर शटरिंग लगा रखी है लेकिन रेत और बजरी न मिलने के कारण कार्य को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया है।
इसके साथ ही कुल्लू में करीब 500 से अधिक टिपर चालकों का काम भी क्रशर बंद होने से ठप हो गया है। टिपर चालकों को अब रोजी-रोजी का संकट खड़ा हो गया है। कुल्लू जिले में सरकार के आदेशों के बाद नौ क्रशर बंद किए गए हैं।
अब क्रशरों में पुराना स्टॉक भी खत्म हो गया है। टिपर चालक प्रतिदिन क्रशरों से रेत और बजरी की सप्लाई ले जाते थे। हुरला से कई टिपर चालक दो से तीन चक्कर दिन में लगाते थे। अब टिपर चालकों को दिन में आर्डर नहीं मिल रहे हैं। इससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
एक सप्ताह पहले कुछ टिपर चालकों ने बजौरा में प्रदर्शन कर सरकार से क्रशर बहाल करने की मांग की थी। टिपर संचालक पवन, करन ठाकुर ने कहा कि कई लोगों ने बैंकों से ऋण लेकर वाहन लिए हैं। अब किस्त भरना मुश्किल हो गया है। क्रशर बंद होने के बाद ठेकेदारों के काम भी ठप हो गए हैं।
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सरकारी काम भी प्रभावित
लोक निर्माण विभाग सहित अन्य विभागों को भी क्रशर बंद होने से काम करने के लिए रेत, बजरी की मुश्किल आ रही है। लोक निर्माण विभाग सड़कों में डंगे नहीं लगा पा रहा है। मनरेगा के तहत होने वाले कामों पर भी असर पड़ा है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एसके धीमान ने कहा कि रेत, बजरी न मिलने से काम प्रभावित हो रहे हैं।