कुल्लू। सेब सीजन में छोटे मालवाहक वाहन चालकों की खूब चांदी हो रही है। सड़कें क्षतिग्रस्त होने से बड़े वाहनों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। ऐसे में बागवानों को छोटे मालवाहक वाहनों में ही सेब भेजना पड़ रहा है। सेब का तुड़ान होने के बाद वाहन चालकों को सब्जी मंडी के लिए एक दिन में तीन से चार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पहले बड़े वाहनों में ज्यादा माल आता है लेकिन छोटे वाहनों में थोड़ा माल आने के कारण ज्यादा चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कुछ चालक सुबह 4 से 5:00 बजे के बीच सेब के क्रेट मंडी पहुंचा रहे हैं। शाम को 4 बजे के बाद एक बार फिर खेप मंडियों में पहुंचाई जा रही है। रात 9 बजे के बाद भी सेब मंडियों में पहुंचाया जा रहा है।
सब्जी मंडियों की दूरी के हिसाब से प्रति क्रेट किराया वसूला जा रहा है। कहीं से 20 तो कहीं से 40 रुपये तक किराया वसूल किया जा रहा है। कैंपर, बोलेरो जीप और पिकअप, छोटे ऑटो की डिमांड इतनी है कि बागवानों को बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। पिकअप चालक रमेश कुमार और अरुण कुमार ने कहा कि बागवानों को खाली क्रेट उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी भी चालक की होती है।
ऐसे में एडवांस बुकिंग करने वालों को क्रेट दिए जा रहे हैं। दूसरी ओर सेब सीजन में ट्रकों का काम घटा है। भुंतर जीप यूनियन के ऑफिस इंचार्ज मछिंद्र गुलेरिया ने कहा कि ग्रामीण इलाकों से सेब छोटे मालवाहक वाहनों में आ रहा है।
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सीवरेज वाली खबर का जोड़
जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता अमित का कहना है कि सोमवार को मौके पर टीम भेजी जाएगी। सीवरेज लाइन अगर कहीं पर क्षतिग्रस्त है तो इसे दुरुस्त किया जाएगा।