कुल्लू। पर्यटन स्थल जलोड़ी दर्रा में पांच करोड़ की लागत से बनी मार्केट में दुकानों की नीलामी हुए चार माह का समय बीत गया लेकिन अभी तक आवंटन न होने से दुकानों का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। इस कारण पर्यटकों और आम लोगों को सुविधा नहीं मिल रही है। दूसरी तरफ वन विभाग ने जलोड़ी दर्रा, सरयोलसर और रघुपुरगढ़ में दुकानों, ढाबाें और कैंपिंग साइटों को हटाकर करीब 200 लोगों को बेरोजगार कर दिया है।
बरसात के कारण जुलाई और अगस्त में आपदा के कारण किसी तरह की गतिविधियां नहीं हुईं। अब जनजीवन पटरी पर आने लगा है और जलोड़ी दर्रा से गुजरने वाले हाईवे-305 पर बसों की आवाजाही भी शुरू हो गई है। हाईवे शुरू होने से अब पर्यटकों का भी आना शुरू हो गया है। जलोड़ी दर्रा, रघुपुरगढ़, सरयोलसर और सोझा सैलानियों की पहली पसंद हैं मगर यहां किसी तरह की सुविधा न होने से सन्नाटा पसरा है।
जलोड़ी दर्रा में 35-40 सालों से दुकान और ढाबा चलाने वाले लोगों को वन विभाग ने बेरोजगार कर दिया है। प्रभावित ओम प्रकाश, राम लाल, दौलत राम, दिनेश कुमार, जय सिंह, ध्यान सिंह, टेक सिंह, बुद्धि सिंह, राजेश कुमार, तुला राम, नारायण दास, सोहन लाल ने कहा कि सरकार ने उनके रोजगार पर जेसीबी चला दी है।
वह तीन से चार दशकों से यहां ढाबा और दुकानें लगाकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। जलोड़ी पर्यटन विकास सहकारी समिति के अध्यक्ष राम लाल, बुद्धि सिंह, राम लाल, रवि कुमार, मोहर सिंह और रविंद्र सिंह ने कहा कि सरकार और वन विभाग ने जलोड़ी दर्रा में वर्षों पुराने ढाबों को उखाड़कर युवाओं को बेरोजगार कर दिया है।
कहा कि यहां सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर मार्केट तैयार की है। उसे नीलाम किए हुए चार महीने बीत गए लेकिन दुकानों को आवंटित नहीं किया गया है। पर्यटकों को आजकल जलोड़ी दर्रा में पानी तक नहीं मिल रहा है। कहा कि पर्यटकों और आम लोगों से गुलजार रहने वाले जलोड़ी दर्रा में सन्नाटा पसरा है। वनमंडल अधिकारी चमन राव ने कहा कि जिन लोगों को दुकानें नीलाम हुई हैं, उनको पत्र भेजे गए हैं। संवाद